Sarguja express…. (दीपक सराठे )
2025 में पहुंचे थे 10 मरीज, इस साल अब तक 18 गंभीर केस; आधे मामले खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़े, अधिकांश मरीज 15 से 40 वर्ष के
अंबिकापुर। सरगुजा में गले पर गंभीर और जानलेवा चोट के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय में वर्ष 2025 में ऐसे 10 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 18 गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। इनमें कई मरीजों की चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी श्वास नली तक कट गई थी। चिकित्सकों ने जटिल ऑपरेशन कर सभी मरीजों की जान बचाने में सफलता हासिल की है।
नाक-कान-गला रोग विभाग के अनुसार आपातकालीन कक्ष से पहुंचे करीब आधे मामले स्वयं को नुकसान पहुंचाने से संबंधित थे, जबकि अन्य मामले आपसी विवाद, रंजिश और हमले से जुड़े थे। अधिकांश मरीजों की उम्र 15 से 40 वर्ष के बीच रही है।
हाल ही में गांधीनगर निवासी 21 वर्षीय छात्रा को गले में गंभीर चोट के बाद बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन उपचार और ऑपरेशन किया। विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार के बाद उसकी जान बचाई गई। वर्तमान में मरीज की स्थिति सुरक्षित है और उसे आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य उपचार व काउंसलिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है।
वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि गले की गंभीर चोट में अत्यधिक रक्तस्राव और श्वास मार्ग बंद होना सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। रक्तस्राव होने पर साफ कपड़े या गॉज से सावधानीपूर्वक दबाव देना चाहिए, लेकिन गले के चारों ओर कसकर पट्टी नहीं बांधनी चाहिए। मरीज को कुछ खाने-पीने न दें और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाएं।
चिकित्सकों ने मानसिक तनाव, निराशा, पारिवारिक समस्या और शैक्षणिक दबाव के संकेतों को भी गंभीरता से लेने की सलाह दी है। ऐसे संकेत मिलने पर संबंधित व्यक्ति को अकेला न छोड़कर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
ईएनटी विभाग में प्रो. डॉ. बी.आर. सिंह, प्रो. डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, डॉ. अनुपम मिंज, डॉ. जी.के. दामले, डॉ. ऊषा आर्मो, डॉ. नेहा स्वर्णकार और डॉ. अदिति गोयल सहित चिकित्सकों की टीम गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों का उपचार कर रही है। गंभीर मरीजों के उपचार में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपलब्ध ब्लड बैंक, 24 घंटे एनेस्थीसिया सेवा, ऑपरेशन थियेटर, वेंटिलेटर, क्रिटिकल केयर और ईएनटी विशेषज्ञों की टीम की अहम भूमिका रही। जटिल ऑपरेशन सहित आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मरीजों को शासन की व्यवस्था के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कान की उपास्थि से दोबारा बनाई श्वास नली
कुछ मरीजों में गले की चोट इतनी गहरी थी कि श्वास नली का हिस्सा कटकर क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे जटिल मामलों में ईएनटी विशेषज्ञों ने कान की उपास्थि (ऑरिकुलर कार्टिलेज) का उपयोग कर क्षतिग्रस्त श्वास नली का पुनर्निर्माण किया। सफल ऑपरेशन के बाद मरीजों की श्वास नली दोबारा कार्यशील हो गई और सभी संबंधित मरीज स्वस्थ हैं।


