31 August 2026
पीएम जनमन योजना की महत्वाकांक्षी सड़क पहली बरसात में ही उखड़ी, गुणवत्ता पर उठे सवाल….₹4.13 करोड़ की लागत से बनी सड़क की खुली पोल, कोरवा ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच
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पीएम जनमन योजना की महत्वाकांक्षी सड़क पहली बरसात में ही उखड़ी, गुणवत्ता पर उठे सवाल….₹4.13 करोड़ की लागत से बनी सड़क की खुली पोल, कोरवा ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

Surguja express….

मो.हदीस,

सीतापुर– विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के दूरस्थ इलाकों को सड़क सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत रजपुरी के बिजली चट्टान पहाड़ क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बनी सड़क पहली ही बरसात में जगह-जगह टूटने और उखड़ने लगी है।जिस कारण इस दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर चलना जोखिम पूर्ण हो गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता और निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।

जानकारी के अनुसार पीएम जनमन योजनान्तर्गत रजपुरी से बिजलीचुआं तक 5.90 किलोमीटर लम्बे सड़क का निर्माण ₹413.63 लाख की लागत से किया गया है, जबकि पांच वर्ष के रखरखाव के लिए ₹23.60 लाख निर्धारित हैं। हाल ही में बनी यह सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल सकी ,परिणाम स्वरूप कई स्थानों पर सड़क की साइड टुटकर सतह उखड़ने, गिट्टी बाहर आने तथा टूट-फूट शुरू होने से निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल तथा निर्धारित मोटाई और तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी है। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही, जिसका परिणाम अब सरकारी धन से बनी सड़क के रूप में सामने आ रहा है।

कोरवा ग्रामीणों ने मांगी जांच

ग्राम पंचायत रजपुरी के बिजली चट्टान पहाड़ क्षेत्र के बंधनु राम कोरवा, नईहारो बाई, सनी राम कोरवा, कुन्दन राम कोरवा, घुरसाय कोरवा, अजय राम कोरवा, संजय कोरवा, अंजना बाई, नान साय कोरवा, सुख मनिया बाई, मनियारो बाई, धनेश्वर कोरवा, दीपक कोरवा, दिनेश कोरवा, सोमार साय कोरवा, कुंवर साय कोरवा, सीताराम सहित अन्य कोरवा ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण, कार्य की माप तथा निर्माण एजेंसी को किए गए भुगतान की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के बजाय निर्माण की गुणवत्ता की वास्तविक जांच होनी चाहिए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके। एवं जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना तभी सार्थक होगी, जब निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क पहली बरसात में ही जवाब दे दे तो यह योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़ा करता है।
अब निगाह जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है कि शिकायत के बाद सड़क का तकनीकी परीक्षण कराकर गुणवत्ता की हकीकत सामने लाई जाती है या मामला महज मरम्मत तक सिमटकर रह जाता है।

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