Sarguja express….
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं की चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा संभाग को पत्र सौंपकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चयनित शिक्षकों की पात्रता, दस्तावेज, विद्यालय में वास्तविक उपस्थिति और शैक्षणिक योगदान के भौतिक सत्यापन की मांग उठाई है।
पत्र में कहा गया है कि राज्यपाल पुरस्कार के लिए शिक्षकों के चयन को लेकर शिक्षा जगत और आम लोगों के बीच विभिन्न प्रकार की चर्चाएं एवं शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अंबिकापुर में पदस्थ कुछ अधिकारी-कर्मचारी कथित रूप से स्वयं या अपने प्रभाव के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और बाद में उन्हीं नामों की पुरस्कार के लिए अनुशंसा की जाती है। कांग्रेस नेता ने कहा है कि इन शिकायतों की सत्यता निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकती है। पत्र में इस वर्ष पुरस्कार के लिए चयनित एक शिक्षिका के संबंध में पूर्व में विभागीय पदस्थापना, युक्तियुक्तकरण और विद्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतें मिलने का उल्लेख किया गया है। विद्यार्थियों से कथित रूप से राशि लिए जाने संबंधी शिकायत की भी जांच कराने की मांग की गई है। कहा गया है कि यदि राशि ली गई है तो उसकी रसीद, उपयोग और विद्यालय के अभिलेखों की जांच की जाए। पत्र में पुरस्कार के लिए अनुशंसा करने वाले अधिकारियों और चयन समिति की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनुशंसाएं निर्धारित नियमों और वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर की गई हैं या नहीं।

चयनित स्कूल में पीने का पानी और शौचालय तक नहीं
परवेज आलम गांधी ने पत्र में आरोप लगाया है कि राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित एक शिक्षिका के अंबिकापुर स्थित प्राथमिक शाला गांधीनगर में बच्चों के लिए पीने के पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान की गरिमा तभी बनी रह सकती है, जब चयन उत्कृष्ट कार्य, समर्पण और वास्तविक शैक्षणिक योगदान के आधार पर हो।
उन्होंने मांग की है कि किसी व्यक्ति विशेष को पहले से दोषी मानने के बजाय स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कर शिकायतों की सत्यता सामने लाई जाए। जांच में अनियमितता, तथ्य छिपाने, गलत जानकारी देने या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति अथवा अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को भी भेजी गई है।


