Sarguja express…..
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से संयुक्त संचालक शिक्षा की अध्यक्षता में जिला मुख्यालय अंबिकापुर में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, संकुल प्राचार्य, स्रोत समन्वयक, अधीक्षिकाएं, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता, अधोसंरचना, छात्रहित की योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा कर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

बैठक में सबसे पहले शाला प्रवेश उत्सव 2026-27 की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रवेश अभियान को गंभीरता से चलाकर अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित बच्चों के ड्रॉपआउट होने की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए गए। निजी विद्यालयों की मान्यता एवं फीस संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई।
बैठक में विद्यालयों में नियमित प्रार्थना सभा, एसडीआरटी वार्षिक कैलेंडर के क्रियान्वयन, शिक्षकों की उपस्थिति और पंजीयन की समीक्षा की गई। स्पष्ट निर्देश दिए गए कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन उनकी नियमित उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा। जिनका पंजीयन अभी तक नहीं हुआ है, उन्हें तत्काल प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मासिक यूनिट टेस्ट, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी पर विस्तार से चर्चा हुई। कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम के लिए सभी प्राचार्यों से कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया। एकल शिक्षकीय विद्यालयों तथा शिक्षक विहीन स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा के दौरान विद्यालयों में स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया। निरीक्षण के दौरान एक विद्यालय के किचन शेड एवं बर्तनों की गंदगी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित संस्था प्रमुख को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी विद्यालयों में रसोईघर, भोजन वितरण और स्वच्छता की नियमित निगरानी करें, ताकि विभाग की छवि प्रभावित न हो।
विद्यालयों में साइकिल वितरण, गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकों के शत-प्रतिशत वितरण के निर्देश दिए गए। कहा गया कि साइकिलों को खुले में नहीं रखा जाए, अन्यथा संबंधित संस्था प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रवृत्ति पोर्टल पर लंबित हजारों प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में पीएचटीजी (विशेष पिछड़ी जनजाति) के बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर विद्यालयों में प्रवेश दिलाने और उनके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। वहीं विद्यालयों में संचालित लाइब्रेरी एवं मुस्कान पुस्तकालय की स्थिति की समीक्षा करते हुए इनके नियमित संचालन के निर्देश दिए गए।
शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया के संबंध में वरिष्ठता सूची जारी होने की जानकारी देते हुए तीन दिनों के भीतर दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा लंबे समय से अनुपस्थित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश जारी किए गए।
बैठक में विद्यालयों में आवारा कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। सभी प्राचार्यों एवं प्रधान पाठकों को विद्यालय स्तर पर नोडल अधिकारी बनाकर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की छात्रवृत्ति योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों से 10वीं एवं 12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक अथवा डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके लिए अगस्त माह से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
बैठक में उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षरों का सर्वे तथा 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को एनआईओएस के माध्यम से पुनः शिक्षा से जोड़ने की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सभी विद्यालयों में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। प्राथमिक विद्यालयों में 10, माध्यमिक में 20, हाईस्कूल में 30 तथा हायर सेकेंडरी विद्यालयों में 40 फलदार एवं छायादार पौधे अनिवार्य रूप से लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों को सौंपने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों, सेजेस विद्यालयों, पीएमश्री विद्यालयों, समावेशी शिक्षा, दिव्यांग बच्चों को उपकरण उपलब्ध कराने, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, पेयजल व्यवस्था, भवन निर्माण कार्यों की प्रगति तथा विद्यालयों के परीक्षा परिणामों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के अंत में संयुक्त संचालक शिक्षा एवं जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी अधिकारियों को शासन के निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने और प्रत्येक विद्यालय में बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि निर्धारित कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं संस्था प्रमुखों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

