5 August 2026
‘सपनों की साइकिल’ या लापरवाही का पहिया? छात्राओं को बांटने से पहले ही मिलीं खामियां
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‘सपनों की साइकिल’ या लापरवाही का पहिया? छात्राओं को बांटने से पहले ही मिलीं खामियां

Sarguja express…..

मणिपुर विद्यालय में पहुंचीं 110 साइकिलों में कई में नट-बोल्ट गायब, सीट टेढ़ी और बास्केट ढीली; पिछले वर्ष की साइकिलें भी अब तक धूल फांक रहीं

अंबिकापुर। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित शासन की साइकिल वितरण योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अंबिकापुर के मणिपुर विद्यालय में छात्राओं के लिए पहुंची साइकिलों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई साइकिलों में नट-बोल्ट गायब हैं, कई के नट-बोल्ट ढीले हैं, बास्केट ठीक से फिट नहीं हैं, जबकि कुछ साइकिलों की सीटें टेढ़ी मिली हैं। ऐसे में इन्हीं साइकिलों का वितरण छात्राओं को किए जाने की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, मणिपुर विद्यालय में करीब 110 साइकिलें पहुंचाई गई हैं। वितरण से पहले जब इनकी जांच की गई तो कई साइकिलों में तकनीकी खामियां सामने आईं। कहीं आवश्यक नट-बोल्ट ही नहीं लगे हैं तो कहीं वे इतने ढीले हैं कि साइकिल चलाना जोखिम भरा हो सकता है। कई साइकिलों की बास्केट हिल रही है, जबकि कुछ की सीटें सही स्थिति में नहीं हैं। इससे छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

यह पहला अवसर नहीं है जब साइकिल वितरण योजना की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी विभिन्न स्कूलों में वितरित साइकिलों को लेकर घटिया निर्माण, खराब फिटिंग और तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। हर वर्ष इस योजना के तहत बड़ी संख्या में छात्राओं को साइकिलें दी जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता को लेकर उठने वाले सवालों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

मणिपुर विद्यालय में पिछले वर्ष की कुछ साइकिलें भी अब तक एक कमरे में रखी हुई हैं और धूल फांक रही हैं। इन साइकिलों का वितरण नहीं हो सका या किसी अन्य कारण से वे उपयोग में नहीं लाई जा सकीं। ऐसे में नई खेप पहुंचने के बाद भी पुरानी साइकिलों का पड़े रहना योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।
शिक्षा से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य छात्राओं को विद्यालय तक सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि वितरण से पहले ही साइकिलों में इस तरह की खामियां सामने आ रही हैं तो यह संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी साइकिलों की तकनीकी जांच कर उन्हें पूरी तरह दुरुस्त किए जाने के बाद ही छात्राओं को वितरित किया जाए। साथ ही दोषपूर्ण साइकिलों की आपूर्ति करने वाले जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, ताकि शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ छात्राओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रूप में मिल सके।

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