Sarguja express…..
प्रतापपुर. वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम मसगा में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार देर रात लगभग 10 से 11 बजे के बीच 12 से 14 हाथियों के दल ने गांव में घुसकर किसानों की धान की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। हाथियों ने खेतों में उत्पात मचाते हुए करीब 3 से 4 एकड़ में लगी धान की फसल को रौंद डाला और काफी मात्रा में फसल खा गए। खेत पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गए, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पलभर में बर्बाद हो गई।
पीड़ित किसान अशोक कुमार जायसवाल (पिता–विक्रम प्रसाद जायसवाल), संदीप कुमार तथा विकास कुमार (ग्राम मसगा) ने बताया कि खेती के लिए बैंक से ऋण लेने के साथ-साथ खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री पर बड़ी राशि खर्च की गई थी। अब फसल नष्ट होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि जब पूरी फसल ही बर्बाद हो गई तो बैंक का कर्ज चुकाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और नुकसान का निरीक्षण किया। किसानों का आरोप है कि कर्मचारियों ने नुकसान देखने के बाद भी स्पष्ट कहा कि शासन के निर्धारित नियमों के कारण वे चाहकर भी पर्याप्त मुआवजा नहीं दिला सकते। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वर्तमान मुआवजा व्यवस्था वास्तविक नुकसान की भरपाई करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से हाथियों का आतंक बना हुआ है, लेकिन वन विभाग की ओर से स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की जा रही। हाथियों के लगातार गांवों और खेतों में पहुंचने से किसानों के साथ-साथ ग्रामीणों में भी भय का माहौल है। रात होते ही लोग खेतों और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
किसानों ने कहा कि फसल नुकसान की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन राहत राशि इतनी कम मिलती है कि उससे वास्तविक नुकसान की भरपाई संभव नहीं हो पाती। ऐसे में किसान आर्थिक रूप से टूटते जा रहे हैं। उन्होंने शासन से मांग की है कि फसल क्षति का वास्तविक आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए तथा हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी उपाय किए जाएं।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे आगामी कृषि कार्य कर सकें और बैंक ऋण चुकाने में कुछ राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और बढ़ सकता है।
ग्रामवासियों ने शासन और वन विभाग से हाथियों के आतंक पर तत्काल नियंत्रण, पर्याप्त मुआवजा तथा किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि केवल औपचारिक निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब जरूरत है कि किसानों की मेहनत और उनकी आजीविका बचाने के लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाए।

