Sarguja express…. (दीपक सराठे )
अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा अंबिकापुर में पाँच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में कुलपति की अध्यक्षता में किया गया। “हैंड्स ऑन प्रैक्टिसेस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला के अंतिम दिन बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा तकनीकी क्षेत्र में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग तथा आधुनिक डिजिटल तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम के पैट्रन एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र लाकपाले ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है और आने वाला समय पूरी तरह एआई आधारित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में संभव है कि अधिकांश कक्षाओं की शिक्षण व्यवस्था एआई संचालित हो जाए और विश्वविद्यालय केवल पारंपरिक शिक्षा केंद्र न रहकर आईटी हब के रूप में विकसित हों। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीकों को सीखने, डिजिटल कौशल विकसित करने तथा शोध और नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। कुलपति ने कहा कि एआई केवल एक तकनीक नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता है और जो युवा समय के साथ स्वयं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे, वही आने वाले समय में सफलता प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य विशेषज्ञ के रूप में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. आलोक कुमार कुशवाहा ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीकी विकास के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और व्यवसाय जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखने और शोध गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के दूसरे विशेषज्ञ डॉ. मोहन राव मामडीकर ने “फ्रॉड डिटेक्शन बाय मशीन लर्निंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर स्कैमिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसे रोकने में मशीन लर्निंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने विभिन्न एआई आधारित तकनीकों और एल्गोरिद्म के माध्यम से समझाया कि मशीन लर्निंग संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने में सक्षम है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर प्रश्न पूछे और नई जानकारियां प्राप्त कीं। समापन अवसर पर कुलपति द्वारा सभी शिक्षकों, विशेषज्ञों और प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव ने विद्यार्थियों को पढ़ाई और शोध में एआई के उपयोग के लिए प्रेरित किया, वहीं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरि शंकर प्रसाद टोंडे ने प्रस्तुत किया।

