8 May 2026
स्वामी सुखानन्द जी महाराज ने रामकथा के माध्यम से दिया भक्ति, सेवा और मर्यादा का संदेश
आयोजन आस्था देश राज्य

स्वामी सुखानन्द जी महाराज ने रामकथा के माध्यम से दिया भक्ति, सेवा और मर्यादा का संदेश

Sarguja express…..
रामकृष्ण विवेकानन्द सेवा आश्रम में दो दिवसीय रामचरित मानस कथा सम्पन्न

अम्बिकापुर

श्री रामकृष्ण विवेकानन्द सेवा आश्रम, अम्बिकापुर में दिनांक 06 मई 2026 से प्रारम्भ हुई दो दिवसीय रामचरित मानस कथा का समापन 07 मई 2026 को भक्तिभाव एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुई । कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, भक्तों एवं नगरवासियों ने उपस्थित होकर रामकथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम में स्वामी सुखानन्द जी महाराज ने अपने प्रवचनों द्वारा रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत एवं भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा के प्रथम दिवस भगवान श्रीराम की बाल्य लीला, धनुष यज्ञ प्रसंग, शबरी प्रसंग एवं नवधा भक्ति का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। स्वामी जी ने कहा—

“भगवान श्रीराम का जीवन मानवता, मर्यादा एवं आदर्शों की अनुपम प्रेरणा है। शबरी की निष्कपट भक्ति हमें यह सिखाती है कि ईश्वर को केवल सच्चा प्रेम और समर्पण प्रिय है।”

उन्होंने नवधा भक्ति के माध्यम से सत्संग, कथा श्रवण, गुरु सेवा, भगवान के गुणगान, मंत्र जाप, संयम, संतोष, सरलता एवं पूर्ण विश्वास जैसे आध्यात्मिक मार्गों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। साथ ही धनुष यज्ञ प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करना धर्म एवं सत्य की विजय का प्रतीक है।

कथा के द्वितीय दिवस गिद्धराज जटायु प्रसंग, सुरसा एवं हनुमान प्रसंग, लंकिनी और हनुमान संवाद, तथा रावण और राम के चरित्र का विस्तृत वर्णन किया गया। स्वामी जी ने कहा—

“हनुमान जी का चरित्र शक्ति, सेवा, विनम्रता एवं पूर्ण समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। वहीं रावण का जीवन अहंकार के दुष्परिणामों को दर्शाता है।”

उन्होंने जटायु प्रसंग के माध्यम से त्याग एवं धर्म रक्षा का संदेश दिया तथा बताया कि भगवान श्रीराम ने जटायु को पिता तुल्य सम्मान देकर मानवता का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत किया। सुरसा एवं लंकिनी प्रसंगों के माध्यम से हनुमान जी की बुद्धिमत्ता, धैर्य एवं भक्ति की महिमा का वर्णन किया गया।

कथा प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से 8:30 बजे तक आयोजित की गई, कथा के दौरान भजन, संकीर्तन एवं आध्यात्मिक वातावरण से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय बना रहा।

आश्रम के सचिव स्वामी तन्मयानन्द ने कथा के सफल आयोजन हेतु सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही आश्रम के अध्यक्ष कान्त दुबे ने सभी आगंतुकों एवं भक्तों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे पूर्ण संसार त्यागी पवित्र संतो द्वारा भगवान की महिमा कथन करने पर श्रोताओं मैं भगवान के प्रति दृढ़ भाव आता है तथा उनको अपने मन के भीतर अभूतपूर्व शांति प्राप्त होती है

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यकारिणी सहित आश्रम परिवार, भक्तगण एवं विद्यालय परिवार का विशेष सहयोग रहा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *