13 October 2026
फर्नीचर खरीदी में 67 लाख के गबन का आरोप, 10 साल बाद 20 हजार पन्नों का चालान पेश…. आरटीआई के माध्यम से परवेज आलम ने किया था घोटाले का खुलासा…
अनियमितता आरोप ख़बर जरा हटके जांच देश प्रशासन बड़ी खबर राज्य शिकायत शिक्षा

फर्नीचर खरीदी में 67 लाख के गबन का आरोप, 10 साल बाद 20 हजार पन्नों का चालान पेश…. आरटीआई के माध्यम से परवेज आलम ने किया था घोटाले का खुलासा…

Sarguja express……
तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक समेत 10 आरोपी; अंबिकापुर की विशेष अदालत में होगी सुनवाई

सरगुजा। वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत मिडिल स्कूलों के लिए हुई फर्नीचर खरीदी में कथित गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने जांच पूरी कर ली है। सोमवार को अंबिकापुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में करीब 20 हजार पन्नों का चालान पेश किया गया। मामले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पांडेय समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में 67 लाख 48 हजार रुपये के गबन की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2), तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत चालान पेश किया गया है। अब मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय अंबिकापुर में होगी।

भौतिक सत्यापन से पहले बांटे चेक
जानकारी के अनुसार, सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदने के लिए 2.70 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। तत्कालीन कलेक्टर और जिला मिशन संचालक की मंजूरी के बाद सीएसआईडीसी की तय दरों पर 10 फर्मों को खरीदी के आदेश दिए गए। फर्नीचर आपूर्ति के लिए 28 मार्च 2011 को 2 करोड़ 68 लाख 18 हजार 838 रुपये के चेक जारी किए गए थे।
जांच समिति के मुताबिक, कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद भुगतान करने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोप है कि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एसपी पांडेय ने आपूर्ति से पहले ही फर्मों को चेक दे दिए। कई फर्मों ने स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षर वाली प्राप्ति रसीदें भी जमा नहीं कीं। फर्नीचर की गुणवत्ता जांच और क्रय समिति से सत्यापन नहीं कराया गया, जबकि फर्मों के साथ आवश्यक अनुबंध भी नहीं किए गए।

दूसरी फर्म के खाते में पहुंचाई रकम

आरोप है कि रायपुर की दर्शन फेब्रिकेटर के नाम जारी खरीदी आदेश अंबिकापुर की आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को दे दिया गया। पटेल ने उसी नाम से बैंक खाता खुलवाकर दो चेकों के जरिए 6 लाख 25 हजार 255 और 22 लाख 91 हजार 909 रुपये जमा कराए और रकम निकाल ली। पूछताछ में उसने 7 लाख रुपये कमीशन के तौर पर एसपी पांडेय को देने की बात कही। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित फर्म ने स्कूलों में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। एक अन्य फर्म पर भुगतान लेने के बाद भी आपूर्ति नहीं करने और आठ फर्मों पर आदेश से कम फर्नीचर पहुंचाने का आरोप है।
आरोपियों में सत्यप्रकाश पांडेय, संजय पटेल, अजय कुमार अग्रवाल, ममता अग्रवाल, बिधी सिंह कटलारिया, राजकुमार बंसल, संदीप तिवारी, हितेश कुमार अग्रवाल, रितेश कुमार अग्रवाल और संजीव गुप्ता शामिल हैं। एसीबी ने 19 अगस्त को सत्यप्रकाश पांडेय और संजय पटेल को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि परवेज आलम के द्वारा आईटीआई के माध्यम से फर्नीचर घोटाले का खुलासा किया गया था इसके साथ-साथ 5 साल तक उनके द्वारा कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *