Sarguja express….(दीपक सराठे )
स्वस्थ होने पर प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी
अंबिकापुर। एक घायल अजगर की जान बचाने के लिए वन्यजीव प्रेमियों ने उसे अंबिकापुर से बिलासपुर तक करीब 250 किलोमीटर का सफर कराया। अजगर के मुंह में ट्यूमर होने के कारण उसे विशेष उपचार की जरूरत थी। बिलासपुर में वन्यजीवों के उपचार के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. पीयूष दुबे ने करीब तीन घंटे तक चले जटिल शल्य-चिकित्सा उपचार के बाद ट्यूमर निकालने की प्रक्रिया पूरी की।
‘स्नेक मैन ऑफ सरगुजा’ के नाम से पहचाने जाने वाले सत्यम द्विवेदी ने इस अजगर को बचाने की पहल की। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर साझा जानकारी में बताया कि अजगर को अंबिकापुर से बिलासपुर ले जाकर उपचार कराया गया। शल्य-चिकित्सा के बाद उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पूरी तरह स्वस्थ होने और सुरक्षित पाए जाने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना है।
वन्यजीवों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती के बीच यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरगुजा में विशेष उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण अजगर को दूर ले जाना पड़ा। इस प्रयास में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने भी सहयोग किया।
सत्यम द्विवेदी ने कहा कि एक बेजुबान जीव की जान बचाना ही वन्यजीव संरक्षण का वास्तविक उद्देश्य है। अजगर के स्वास्थ्य में सुधार के बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक वातावरण में लौटाया जाएगा।


