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अंबिकापुर : माता राजमोहिनी देवी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मनमानी और स्वेच्छाचारिता हावी है। नया शिक्षा सत्र आरंभ हो चुका है।नियमों के तहत प्रबंधन को जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष के साथ बैठक कर उपलब्ध सुविधाओं,संसाधनों की समीक्षा कर विद्यार्थियों के हित में निर्णय ले लेना था लेकिन प्रबंधन ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। फैकल्टी की उपलब्धता को लेकर भी तैयारियां अभी से शुरू करनी चाहिए थी लेकिन यहां की प्राचार्य को इन सबसे कोई लेना देना नहीं है। वे अपने हिसाब से कालेज को चलाना चाहती हैं।

शहर में ही संचालित राजीव गांधी शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनभागीदारी समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं। उन बैठकों में कॉलेज में सुविधा विस्तार और विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन पर अमल भी शुरू हो चुका है। लेकिन माता राजमोहिनी कॉलेज में स्थिति इसके ठीक विपरीत है।शासन स्तर से वरिष्ठ पार्षद विजय सोनी को माता राजमोहिनी देवी शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है लेकिन प्रबंधन कालेज में सुविधा विस्तार को लेकर उनसे किसी प्रकार का कोई परामर्श नहीं कर रहा है। नए शिक्षा सत्र शुरू हुए एक माह से अधिक हो गया, लेकिन कॉलेज में सुविधा विस्तार और शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर प्राचार्य ने कोई रुचि ही नहीं दिखाई है।

शासन के निर्देशों की अवहेलना
नियमों के अनुसार नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले जनभागीदारी समिति अध्यक्ष के साथ बैठकर कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों पर चर्चा की जानी थी। अतिथि शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर प्रयास शुरू किए जाने थे। नव प्रवेशी विद्यार्थियों का इंडक्शन कार्यक्रम भी जनभागीदारी समिति अध्यक्ष की उपस्थिति में होना था। राजीव गांधी कॉलेज में यह सब हो चुका है। माता राजमोहिनी कॉलेज में एक भी काम नहीं हुआ।स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी प्राचार्य ने अध्यक्ष को आमंत्रण देना तो दूर, संपर्क तक नहीं किया।

मनमाना निर्णय लेता है प्रबंधन
कॉलेज की प्राचार्य की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है। कालेज स्टाफ के बीच अंदरूनी झगड़े का असर यहां की व्यवस्था पर पड़ता है।यहां के एक सहायक प्राध्यापक पर छात्रा से बदनीयती व अभद्र व्यवहार का आरोप लग चुका है। मामला पुलिस तक पहुंचा था। गुरु-शिष्य की परंपरा पर दाग लगा था।जनभागीदारी समिति का गठन शासन ने कॉलेज के विकास, संसाधन जुटाने और प्रबंधन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किया है। समिति स्थानीय स्तर पर धन एकत्र कर बुनियादी ढांचे का विकास करती है। शिक्षकों की कमी पर अपने फंड से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करती है। सरकारी प्रक्रिया में लगने वाले समय को बचाकर छात्रहित के निर्णय तुरंत लेती है।लेकिन माता राजमोहिनी कॉलेज की प्राचार्य इन सभी व्यवस्थाओं को अपने स्तर पर मनमाने तरीके से संचालित करना चाह रही हैं। शासन का मानना है कि जनभागीदारी समिति व्यवस्था संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी कारण वरिष्ठ पार्षद विजय सोनी को अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इसके बाद भी प्राचार्य द्वारा स्वेच्छाचारिता बरती जा रही है।
जनभागीदारी समिति का यह है उद्देश्य
स्थानीय शिक्षाविदों का कहना है कि जनभागीदारी से कॉलेज की व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा सकता था। सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण जनभागीदारी समिति अपने स्तर से जनप्रतिनिधियों और शासन से समन्वय बनाकर यहां सुविधाओं ,संसाधनों को और बेहतर बना सकती है लेकिन प्राचार्य की इच्छाशक्ति की कमी और मनमानी के कारण सब कुछ ठप है।शासन ने जिस उद्देश्य से जनभागीदारी समिति बनाई, उसे माता राजमोहिनी कॉलेज में मजाक बना दिया गया है। प्रबंधन के इस रवैय्ये से कालेज का हित प्रभावित हो रहा है। यहां संभाग भर से छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए आती है।



