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मणिपुर विद्यालय में गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद विभाग हरकत में आया, डीईओ बोले— पिछले साल की तुलना में इस बार बेहतर हैं साइकिलें

अंबिकापुर। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित शासन की साइकिल वितरण योजना में सामने आई खामियों की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। मणिपुर विद्यालय में रखी गई साइकिलों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद दूसरे ही दिन जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कई साइकिलों की जांच कराई। जिन साइकिलों के नट-बोल्ट ढीले थे, उन्हें कसवाया गया, जिन टायरों में हवा कम थी उनमें हवा भरवाई गई और आवश्यक सुधार के बाद छात्राओं को साइकिल वितरण भी शुरू कर दिया गया।
गौरतलब है कि मणिपुर विद्यालय में करीब 110 साइकिलें पहुंची थीं। वितरण से पहले निरीक्षण के दौरान कई साइकिलों में नट-बोल्ट गायब, कई में ढीले नट-बोल्ट, ठीक से फिट नहीं की गई बास्केट और टेढ़ी सीट जैसी खामियां सामने आई थीं। इस संबंध में प्रकाशित खबर के बाद विभाग सक्रिय हुआ और सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
हालांकि विद्यालय परिसर में अभी भी कई साइकिलें वितरण के लिए रखी हुई हैं। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या सभी साइकिलों की तकनीकी जांच पूरी तरह करने के बाद ही उनका वितरण किया जाएगा, ताकि छात्राओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष उपलब्ध कराई गई साइकिलों की गुणवत्ता बेहतर है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिले में 5,400 साइकिल वितरण का लक्ष्य था, जबकि इस वर्ष लगभग 6,000 साइकिलें वितरित की जानी हैं। उनके अनुसार कुछ साइकिलों की कसावट में मामूली कमी थी और लंबे समय तक रखे रहने के कारण कुछ टायरों की हवा निकल गई थी, जिसे दुरुस्त कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि गुणवत्ता के लिहाज से इस वर्ष की साइकिलें अच्छी हैं।
फिलहाल यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि छात्राओं को साइकिलें सौंपने से पहले उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की पूरी जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ सुरक्षित और प्रभावी ढंग से हितग्राहियों तक पहुंच सके।

