19 October 2026
150 पशु सखियों को प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र, अब गांवों में देंगी पशु स्वास्थ्य सेवाएं
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150 पशु सखियों को प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र, अब गांवों में देंगी पशु स्वास्थ्य सेवाएं

Sarguja express…. 

सेंट्रल बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की पहल; पशु सखियों को मुद्रा ऋण से जोड़ने की तैयारी

अंबिकापुर। ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालकों को गांव में ही प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सरगुजा ने पहल की है। संस्थान ने इस वित्तीय वर्ष में पांच प्रशिक्षण समूहों के माध्यम से 150 पशु सखियों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षित महिलाओं को आयोजित कार्यक्रम में प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में मंत्री राजेश अग्रवाल, सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, कलेक्टर अजीत बसंत और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण के बाद पशु सखियां अपने क्षेत्रों में पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल और प्राथमिक उपचार से जुड़ी सेवाएं दे रही हैं। इससे पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर मदद मिल रही है, वहीं पशु सखियों के लिए आजीविका का अवसर भी तैयार हुआ है।
प्रशिक्षण में जिला पंचायत की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन टीम के राहुल मिश्रा, पशुपालन विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों और उपसंचालक का सहयोग रहा। प्रशिक्षक ए.के. तिवारी, कुशवाहा और अम्बष्ठ तथा आरसेटी की संकाय सदस्य तमन्ना निशा ने प्रशिक्षण और व्यावहारिक जानकारी देने में योगदान दिया।
पशु सखियों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने के लिए बैंक मित्र पर्यवेक्षक रिजवान अहमद ने खाते खुलवाने और पासबुक उपलब्ध कराने में सहयोग किया। स्वरोजगार को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित महिलाओं से मुद्रा ऋण के आवेदन भी भरवाए गए हैं। आवेदन जिला अग्रणी प्रबंधक के माध्यम से संबंधित बैंकों को भेजे गए हैं। पात्र पशु सखियों को ऋण उपलब्ध होने पर वे अपना काम विस्तार से कर सकेंगी।
सेंट्रल बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख राजेश कुमार के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल में आरसेटी सरगुजा के निदेशक श्याम गुप्ता की योजना, प्रशिक्षण संचालन और विभागों से समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्थान का कहना है कि प्रशिक्षण, बैंकिंग सुविधा और ऋण सहायता को जोड़कर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा पशुपालन सेवाओं की स्थानीय उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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