Sarguja express…….
मो.हदीस सीतापुर/सरगुजा:
कलेक्टर सरगुजा के निर्देशानुसार जिले में उर्वरकों के अवैध भंडारण और परिवहन पर सतत निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में उपसंचालक कृषि सरगुजा श्री पीताम्बर सिंह दीवान के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की टीम द्वारा सीतापुर क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की गई है।
बुधवार 13 मई की रात्रि लगभग 7:00 बजे, मुखबिर की सूचना के पर सीतापुर थाना के सामने एक पिकअप वाहन क्रमांक CG 14 MK 6568 को जांच हेतु रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें 70 बोरी नीम कोटेड यूरिया लदा पाया गया। मौके पर उपस्थित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती लीली मॉरिस बाखला (सीतापुर), श्री गंगा राम पैंकरा (मैनपाट), उर्वरक निरीक्षक श्री संतोष कुमार बेक एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री अमित गुप्ता द्वारा वाहन चालक से उर्वरक परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेजों की मांग की गई।
वाहन चालक द्वारा मौके पर उर्वरक से संबंधित अनिवार्य दस्तावेज यथा—POS रसीद, M-फार्म, ई-वे बिल (e-way bill) या चालान प्रस्तुत नहीं किया गया। बिना वैध दस्तावेजों के उर्वरक का यह परिवहन आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर 1985 एवं फर्टिलाइजर मूवमेंट कंट्रोल ऑर्डर की विभिन्न धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए
तदनुसार, कृषि विभाग द्वारा उक्त वाहन एवं उर्वरक को जप्त कर थाना के सुपुर्दगी में दे दिया गया है। विभाग द्वारा प्रकरण तैयार कर अग्रिम कानूनी कार्यवाही हेतु न्यायालय कलेक्टर सरगुजा को प्रेषित किया जा रहा है। साथ ही, उर्वरक की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं ताकि खाद के मानक या मिलावट की जांच की जा सके।वही पूछताछ में
वाहन चालक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उक्त उर्वरक अन्नपूर्णा खाद भंडार पत्थलगांव का है, जिसे अजीत गुप्ता (पिता मोहन गुप्ता), निवासी कमलेश्वरपुर, मैनपाट द्वारा मंगवाया गया था।
जब अधिकारियों ने सबंधित व्यक्ति से सम्पर्क साधा तो किसी भी व्यक्ति द्वारा जप्त उर्वरक पर अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई ।
कृषि विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण खाद आपूर्ति में उत्पन्न संशय का लाभ उठाकर कालाबाजारी या अवैध परिवहन करने वालों के विरुद्ध विभाग की शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति जारी रहेगी, शासन प्रशासन उर्वरक विक्रय और वितरण पर शख्त निगरानी रखी हुई है।
यूरिया की अत्यधिक मांग और आपूर्ति को देखते हुवे जिले में नील हरित काई BGA कल्चर को विभाग किसानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है जिससे प्राकृतिक नाइट्रोजन को वायुमंडल से मिट्टी में स्थिर करके यूरिया की मांग को कुछ हद तक सीमित किया जा सके।

