13 May 2026
ऊर्जा संरक्षण का संदेश देने मंत्री राजेश अग्रवाल ने छोड़ा विशेष प्रोटोकॉल और सुरक्षा काफिला
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ऊर्जा संरक्षण का संदेश देने मंत्री राजेश अग्रवाल ने छोड़ा विशेष प्रोटोकॉल और सुरक्षा काफिला

Sarguja express…..

राष्ट्र प्रथम की भावना से लिया निर्णय, अनावश्यक पायलट और फॉलो वाहनों के उपयोग पर लगाई रोक

<>अंबिकापुर। वैश्विक ऊर्जा संकट, लगातार बढ़ती ईंधन खपत और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के आह्वान से प्रेरित होकर मंत्री अग्रवाल ने अपने राजकीय दौरों के दौरान पायलट वाहन, फॉलो वाहन तथा अन्य विशेष प्रोटोकॉल का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में ईंधन की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी बन गई है। इसी भावना के अनुरूप उन्होंने अपने सुरक्षा काफिले में केवल अपरिहार्य वाहनों को ही शामिल करने और अनावश्यक वाहनों को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य स्थिति बहाल होने तक वे किसी भी प्रकार की पायलट गाड़ी, फॉलो वाहन या अतिरिक्त प्रोटोकॉल का उपयोग नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें। यदि जनप्रतिनिधि ही संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देंगे, तो समाज में भी इसके प्रति सकारात्मक जागरूकता बढ़ेगी। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि यह समय जिम्मेदारी, संयम और जनभावनाओं के साथ खड़े रहने का है।

मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना को आत्मसात करते हुए ईंधन की बचत के लिए अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का उपयोग करें। इसके साथ ही कारपूलिंग की व्यवस्था अपनाएं और संसाधनों का संयमित उपयोग करें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार आत्मनिर्भर भारत, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में देशवासियों को प्रेरित कर रहे हैं। उन्हीं की प्रेरणा से यह निर्णय लिया गया है, ताकि शासन और जनप्रतिनिधि स्वयं एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर सकें।

मंत्री अग्रवाल के इस निर्णय को प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर एक सराहनीय पहल माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इसी प्रकार संसाधनों की बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करें, तो इससे समाज में व्यापक सकारात्मक संदेश जाएगा और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास मजबूत होंगे।

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