Sarguja express….
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने NCLT के हालिया फैसले को लेकर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बड़े कॉरपोरेट कर्ज़ों के निपटारे से एक बार फिर देश के सामने यह सवाल खड़ा हुआ है कि क्या आर्थिक न्याय के मामले में अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग पैमाने हैं?
परवेज़ गांधी ने कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी जी लगातार देश के सामने यह सवाल उठाते रहे हैं कि मोदी सरकार में अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग व्यवस्था दिखाई देती है। आम आदमी कुछ हजार या लाख रुपये का कर्ज़ नहीं चुका पाए तो बैंक उसकी संपत्ति कुर्क और नीलाम करने तक पहुंच जाता है। किसान कर्ज़ के दबाव में आत्महत्या करने तक मजबूर हो जाते हैं। लेकिन बड़े कॉरपोरेट कर्ज़दारों के मामलों में हजारों करोड़ रुपये के कर्ज़ के निपटारे में बड़ी राहत और समझौते की व्यवस्था दिखाई देती है।
उन्होंने सवाल उठाया—गरीब के लिए कर्ज़ जिंदगी भर का बोझ और बड़े उद्योगपति के लिए कर्ज़ सौदेबाजी का अवसर क्यों?
परवेज़ गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए ₹72,000 करोड़ की कृषि ऋणमाफी की थी। वहीं मोदी सरकार के दौर में बड़े कॉरपोरेट कर्ज़ों के राइट-ऑफ और निपटारे को लेकर लाखों करोड़ रुपये की चर्चा होती रही है, जबकि किसानों की देशव्यापी कर्ज़माफी की मांग लगातार अनसुनी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल पैसों का नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और आर्थिक न्याय का सवाल है। बैंकों में जमा पैसा करोड़ों आम भारतीयों की मेहनत की कमाई है। इसलिए बड़े कर्ज़ों के राइट-ऑफ और सेटलमेंट में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए।
परवेज़ गांधी ने कहा, “मोदी सरकार बताए—जब गरीब बैंक का छोटा कर्ज़ नहीं चुका पाता तो उसकी संपत्ति तक नीलाम हो जाती है, लेकिन बड़े कर्ज़दारों के हजारों करोड़ के मामलों में राहत के रास्ते क्यों खुल जाते हैं? देश में कानून एक होना चाहिए, कर्ज़दार चाहे गरीब हो या अरबपति।”
उन्होंने कहा कि Zee News और उसके मालिक सुभाष चंद्रा से जुड़े विवादों और मीडिया की भूमिका को भी देश को नहीं भूलना चाहिए। उनका आरोप है कि लंबे समय से टीवी मीडिया के एक हिस्से ने नफरत और विभाजन की भाषा को बढ़ावा दिया, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान देश के सामाजिक माहौल और युवाओं की सोच को हुआ है।
परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था चुनिंदा बड़े उद्योगपतियों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की मेहनत की कमाई की सुरक्षा के लिए है। सरकार को कॉरपोरेट कर्ज़ निपटारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ किसानों, छोटे व्यापारियों और आम कर्ज़दारों के लिए भी न्यायपूर्ण राहत नीति बनानी चाहिए।

