13 September 2026
डाकघर में ‘पैसे जमा’ की जगह लाखों का खेल! उप डाकपाल पर 14 लाख की हेराफेरी का आरोप….. फर्जी हस्ताक्षर से तीन बार निकाली रकम, जांच के बाद आरोपी गिरफ्तार; 25 सितंबर तक न्यायिक रिमांड
आरोप कार्रवाई क्राइम बड़ी खबर राज्य

डाकघर में ‘पैसे जमा’ की जगह लाखों का खेल! उप डाकपाल पर 14 लाख की हेराफेरी का आरोप….. फर्जी हस्ताक्षर से तीन बार निकाली रकम, जांच के बाद आरोपी गिरफ्तार; 25 सितंबर तक न्यायिक रिमांड

Sarguja express…..

मो.हदीस,

सीतापुर– डाकघर का नाम सुनते ही लोगों को अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहने का भरोसा होता है, लेकिन सीतापुर उप डाकघर से सामने आया मामला इस भरोसे पर सवाल खड़ा कर रहा है। यहां एक उप डाकपाल पर बचत खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर 14 लाख रुपये निकालने का गंभीर आरोप लगा है। यानी जिस व्यवस्था में लोगों की जमा पूंजी की रखवाली होनी चाहिए थी, वहीं कथित तौर पर रकम निकालने का खेल चलता रहा।
मामले की शिकायत मिलने के बाद हुई जांच में सामने आया कि संबंधित बचत खाते से 17 मार्च 2025 को 5 लाख रुपये, 15 अप्रैल को 4 लाख रुपये और 30 अप्रैल को 5 लाख रुपये, यानी कुल 14 लाख रुपये निकाले गए। जांच में आरोप है कि उप डाकपाल सूरज दास महंत (40), निवासी लोढ़ाझर, थाना भूपदेवपुर, जिला रायगढ़ ने आहरण पर्ची पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकाली।
ममता सिंह की शिकायत पर जब विभागीय अभिलेखों की पड़ताल हुई तो मामले की परतें खुलती चली गईं। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि 5000 रुपये से अधिक की राशि के भुगतान के लिए सुपरवाइजर द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया के बावजूद संबंधित रकम का आहरण किया गया।
मामले में पुलिस ने आरोपी उप डाकपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 336(3), 338 एवं 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 12 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 25 सितंबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

*जमा पूंजी की रखवाली में ही सेंध?

इस पूरे मामले ने डाकघर की वित्तीय व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो सवाल यह है कि फर्जी हस्ताक्षर से लाखों रुपये तीन अलग-अलग तारीखों में निकलते रहे और संबंधित व्यवस्था को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी? अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या फिर इस कथित हेराफेरी में जिम्मेदारी तय करते हुए पूरी व्यवस्था की भी पड़ताल होती है।

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