Sarguja express….
1986 में लिया था नेत्रदान का प्रण, परिजनों ने अंतिम इच्छा का किया सम्मान; रेडक्रॉस और चिकित्सकीय टीम के सहयोग से संपन्न हुई प्रक्रिया
अंबिकापुर,।
मृत्यु के बाद भी समाज को जीवन और रोशनी का संदेश देने वाली एक प्रेरणादायक मिसाल अंबिकापुर में सामने आई है। जायसवाल समाज के संरक्षक तथा अजीरमा स्थित जायका मसाला फैक्ट्री के संचालक स्वर्गीय कौनतेय जायसवाल का 4 सितंबर को निधन हो गया। उन्होंने वर्ष 1986 में नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान के लिए सहमति दी, जिसके बाद सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय कौनतेय जायसवाल के परिजनों ने नेत्रदान की इच्छा पूरी करने के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा सरगुजा के आजीवन सदस्य डॉ. अर्पण सिंह चौहान से संपर्क किया। इसके बाद रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा त्वरित समन्वय स्थापित करते हुए राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय, अंबिकापुर के नेत्र रोग विभाग से संपर्क किया गया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की गई।
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया में जिला चिकित्सालय अंबिकापुर के सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. जे.के. रेलवानी का महत्वपूर्ण प्रशासनिक सहयोग मिला। वहीं नेत्रदान अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो के मार्गदर्शन में चिकित्सकीय टीम ने सफलतापूर्वक नेत्र संग्रहण की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान डॉ. अभिजीत जैन और डॉ. अभिषेक का भी विशेष सहयोग रहा।
चिकित्सकीय और रेडक्रॉस टीम ने निभाई अहम भूमिका
नेत्रदान की प्रक्रिया में रमेश घृतकर (सहायक नेत्रदान अधिकारी), मोहम्मद शाहिद हुसैन (नेत्र सहायक अधिकारी), जय प्रकाश विश्वकर्मा (नेत्र सहायक अधिकारी) तथा आरती सारथी (नेत्र सहायक अधिकारी) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संग्रहित नेत्रों को सुरक्षित रूप से बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मोहम्मद शाहिद हुसैन और वाहन चालक निरंजन तिर्की ने निभाई।
शोक की घड़ी में लिया प्रेरणादायी निर्णय
इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा सरगुजा ने कहा कि शोक की कठिन घड़ी में परिजनों द्वारा लगभग 40 वर्ष पुराने नेत्रदान संकल्प को पूरा करने की सहमति देना अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय कदम है। यह निर्णय न केवल स्वर्गीय कौनतेय जायसवाल की इच्छा का सम्मान है, बल्कि समाज में नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने वाला प्रेरक उदाहरण भी है।
समाज को दिया मानवीय संदेश
रेडक्रॉस सोसायटी ने इस मानवीय कार्य में सहयोग देने वाले स्वर्गीय कौनतेय जायसवाल के परिजनों, जिला चिकित्सालय प्रशासन, चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग तथा सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि वे नेत्रदान और अंगदान के महत्व को समझें तथा स्वयं संकल्प लेकर दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों की दुनिया रोशन कर सकता है। स्वर्गीय कौनतेय जायसवाल का यह निर्णय और उनके परिवार की संवेदनशीलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

