2 September 2026
बिखरते परिवारों के दौर में मिसाल बना गुप्ता परिवार, हर महीने एक दिन साथ बैठकर खाते हैं 50-60 सदस्य
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बिखरते परिवारों के दौर में मिसाल बना गुप्ता परिवार, हर महीने एक दिन साथ बैठकर खाते हैं 50-60 सदस्य

Sarguja express…..

रामानुजगंज। बदलते दौर में जहां संयुक्त परिवार धीरे-धीरे एकल परिवारों में सिमटते जा रहे हैं, वहीं पारिवारिक रिश्तों में दूरी और आपसी उलझन भी बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे समय में रामानुजगंज के एक गुप्ता परिवार ने आपसी प्रेम, सामंजस्य और पारिवारिक एकता को बनाए रखने की अनूठी पहल शुरू की है। परिवार की यह पहल न केवल रिश्तों को मजबूत कर रही है, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दे रही है।

रामानुजगंज में गुप्ता परिवार के करीब 12 घर हैं, जबकि गढ़वा में परिवार के लगभग तीन घर हैं। परिवार के सदस्यों ने पिछले जनवरी से हर महीने एक दिन सामूहिक भोज करने की परंपरा शुरू की है। हर माह परिवार के किसी एक सदस्य के घर पर सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें करीब 50 से 60 सदस्य शामिल होते हैं। इसमें परिवार के बच्चे, युवा, महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सभी एक साथ शामिल होते हैं।
इस सामूहिक भोज की खास बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन परिवार की महिलाएं मिलकर तैयार करती हैं। एक ही स्थान पर पूरा परिवार जुटता है और साथ बैठकर भोजन करता है। भोजन के साथ परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत और हंसी-मजाक का दौर चलता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए मनोरंजन के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे परिवार के बीच अपनापन और बढ़ता है।

सामूहिक भोज में सुलझते हैं पारिवारिक विवाद

परिवार की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि किसी सदस्य के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव या विवाद की स्थिति बनती है, तो उसे दूर करने का प्रयास भी इसी सामूहिक मिलन के दौरान किया जाता है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को सुलझाने की पहल करते हैं। वहीं परिवार के किसी सदस्य को आर्थिक, सामाजिक या अन्य किसी प्रकार की परेशानी होने पर सभी मिलकर उसका समाधान निकालने का प्रयास करते हैं।

एक दिन का मिलन, रिश्तों में पूरे महीने की मजबूती

परिवार के सदस्यों का मानना है कि आज की व्यस्त जिंदगी में परिवार के लोगों का एक-दूसरे से मिलना-जुलना कम होता जा रहा है। ऐसे में महीने में एक दिन सभी का एक साथ बैठना रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम बन गया है। इस दौरान पुराने गिले-शिकवे दूर होते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच संवाद बना रहता है। जिस दौर में छोटी-छोटी बातों को लेकर परिवारों में तनाव और दूरियां बढ़ रही हैं, उस समय गुप्ता परिवार की यह पहल रिश्तों को जोड़ने वाली मिसाल बन रही है। परिवार के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की सहभागिता इस पहल को और खास बनाती है। सामूहिक भोज के माध्यम से परिवार न केवल अपनी एकता को कायम रख रहा है, बल्कि समाज को भी यह संदेश दे रहा है कि संवाद और साथ बैठने से बड़ी से बड़ी पारिवारिक उलझन को सुलझाया जा सकता है।

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