Sarguja express…. (दीपक सराठे )
कलेक्टर ने की सराहना
बलरामपुर-रामानुजगंज। विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) पण्डो समुदाय के होनहार छात्र अरविन्द कुमार पण्डो ने अभाव और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करते हुए नीट (NEET) परीक्षा में सफलता हासिल कर समाज और जिले का नाम रोशन किया है। अरविन्द का चयन रायपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय पं. जवाहर लाल नेहरू में एमबीबीएस के लिए हुआ है। प्रवेश शुल्क की राशि कम पड़ने पर सर्व समाज के लोगों ने आर्थिक सहयोग कर उनके डॉक्टर बनने के सपने को आगे बढ़ाने में मदद की।
रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम चुनापाथर निवासी अरविन्द कुमार पण्डो, पिता रमेश पण्डो का परिवार खेती और दैनिक मजदूरी पर निर्भर है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और संसाधनों की कमी के बावजूद अरविन्द ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। बिना किसी कोचिंग के लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने नीट में सफलता हासिल की। परिवार में अब तक कोई उच्च शिक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। अरविन्द अपने परिवार के पहले सदस्य होंगे, जो डॉक्टर बनेंगे।
प्रवेश के समय कम पड़ गए थे 40 हजार रुपए
नीट में सफलता और मेडिकल कॉलेज में चयन के बाद अरविन्द के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रवेश शुल्क की व्यवस्था करना था। 29 अगस्त को प्रवेश की अंतिम तिथि थी और परिवार के पास करीब 40 हजार रुपए कम पड़ रहे थे। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि परिजनों ने खेत-जमीन गिरवी रखकर राशि जुटाने की कोशिश की, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली।
ऐसे समय में समाजसेवी उदय कुमार पण्डो ने अरविन्द की मदद के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक सहयोग की अपील की। इसके बाद पण्डो समाज, सर्व आदिवासी समाज सहित अन्य समाज के लोग भी मदद के लिए आगे आए।
देखते ही देखते जुट गए 67,900 रुपए
सोशल मीडिया पर की गई अपील के बाद लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग देना शुरू किया। देखते ही देखते कुल 67 हजार 900 रुपए की राशि एकत्र हो गई। इस सहयोग से अरविन्द के प्रवेश शुल्क की व्यवस्था हुई और निर्धारित समय पर मेडिकल कॉलेज में उनका प्रवेश सुनिश्चित हो सका।
अरविन्द ने अपनी सफलता को संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम बताया। उन्होंने समाजसेवी उदय कुमार पण्डो द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक जनजागरूकता को लेकर किए जा रहे प्रयासों से प्रेरणा मिलने की बात कही।
डॉक्टर बनकर गरीब और वंचितों की सेवा का सपना
अरविन्द का कहना है कि डॉक्टर बनने के बाद वे गरीब, वंचित और विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों की सेवा करना चाहते हैं। आर्थिक तंगी के बीच नीट में सफलता और फिर समाज के सहयोग से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश तक का उनका सफर क्षेत्र के दूसरे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।

