17 August 2026
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर ‘एमबीबीएस चायवाला’, इंटर्न ने चाय बेचकर जताया विरोध
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स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर ‘एमबीबीएस चायवाला’, इंटर्न ने चाय बेचकर जताया विरोध

Sarguja express…..
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में आंदोलन का 14वां दिन, बोले—15,900 रुपये मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं, कम से कम 30 हजार करने की मांग

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में एमबीबीएस इंटर्न ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के 14वें दिन इंटर्न ने अस्पताल की कैजुअल्टी के सामने प्रतीकात्मक रूप से ‘एमबीबीएस चायवाला’ कार्यक्रम आयोजित कर चाय बेचते हुए शासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। प्रदर्शन के माध्यम से इंटर्न ने संदेश दिया कि चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने और अस्पताल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है।
17 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एमबीबीएस इंटर्न शामिल हुए। इंटर्न का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में एमबीबीएस इंटर्न को महज 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनका दावा है कि कई अन्य राज्यों में इंटर्न को करीब 44 हजार रुपये या इससे अधिक प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में भी स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह की जानी चाहिए।
इंटर्न ने बताया कि स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से शासन एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण 6 अगस्त से इंटर्न अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल एवं कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। सोमवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा।
चाय बेचकर व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारी इंटर्न ने कहा कि ‘एमबीबीएस चायवाला’ कार्यक्रम किसी व्यवसाय को छोटा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति और कम स्टाइपेंड की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रतीकात्मक प्रयास है। मेडिकल की कठिन पढ़ाई और अस्पताल में मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी के अनुरूप उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
इंटर्न ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। आपातकालीन एवं जीवनरक्षक सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जा रहा है और गंभीर मरीजों के उपचार में किसी तरह की बाधा न आए, इसका ध्यान रखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं या जनहित को प्रभावित करना नहीं, बल्कि अपनी मांग शासन तक मजबूती से पहुंचाना है। इंटर्न ने राज्य सरकार से स्टाइपेंड वृद्धि पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेते हुए आंदोलन समाप्त कराने की दिशा में पहल करने की मांग की है।

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