29 July 2026
निजी प्रकाशकों की किताबों पर बढ़ा विवाद, एनसीईआरटी लागू कराने पर अड़े जिला शिक्षा अधिकारी…..अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों पर मनमानी और महंगी किताबें थोपने का लगाया आरोप, जिला शिक्षा अधिकारी बोले- सभी स्कूलों को पढ़ानी होंगी एनसीईआरटी की पुस्तकें
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निजी प्रकाशकों की किताबों पर बढ़ा विवाद, एनसीईआरटी लागू कराने पर अड़े जिला शिक्षा अधिकारी…..अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों पर मनमानी और महंगी किताबें थोपने का लगाया आरोप, जिला शिक्षा अधिकारी बोले- सभी स्कूलों को पढ़ानी होंगी एनसीईआरटी की पुस्तकें

Sarguja express
अंबिकापुर।
सरगुजा जिले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें चलाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अभिभावक संघ ने आरोप लगाया है कि कई निजी स्कूल शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए पहली से आठवीं कक्षा तक निजी प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य रूप से खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की गई है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी निजी स्कूलों को पाठ्यक्रम के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें ही लागू करनी होंगी।
चार माह पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल, होली क्रॉस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ओरिएंटल पब्लिक स्कूल, न्यू डीपीएस सरगवां, मोंटफोर्ट स्कूल, बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल सहित अन्य सीबीएसई विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया था। इन विद्यालयों पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें और कॉपियों का बंडल खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने के आरोप लगे थे। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
हालांकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद अधिकांश निजी विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक अब भी निजी प्रकाशकों की किताबें ही पढ़ाई जा रही हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। दूसरी ओर नौवीं से बारहवीं तक अधिकांश विद्यालयों में पहले से ही एनसीईआरटी की पुस्तकें संचालित हैं।
बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस के बाद कुछ निजी विद्यालयों ने अभिभावकों की सहमति का हवाला देते हुए जवाब प्रस्तुत किया है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश अभिभावक निजी प्रकाशकों की पुस्तकें ही पढ़ाना चाहते हैं। इसी आधार पर उन्होंने शासन को अपना पक्ष भेजा है।
इधर अभिभावक संघ ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है। संघ का आरोप है कि कुछ विद्यालय चुनिंदा अभिभावकों की बैठक बुलाकर उसे बहुमत की राय बताकर शासन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को अभिभावक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की।
अभिभावक संघ के अनुसार निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में कई गुना महंगी होती हैं। हर वर्ष कुछ किताबों का संस्करण बदल दिया जाता है, जिससे पुराने विद्यार्थियों की पुस्तकें नए छात्रों के काम नहीं आतीं और अभिभावकों को हर साल नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। संघ ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है और कमीशनखोरी को बढ़ावा मिल रहा है।
इस बीच होली क्रॉस स्कूल में आयोजित अभिभावक बैठक भी विवाद का कारण बन गई है। अभिभावकों का कहना है कि बैठक में सीमित संख्या में लोगों से ही राय ली गई, जबकि अधिकांश अभिभावकों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। बैठक के आधार पर बहुसंख्यक अभिभावकों की सहमति बताना उचित नहीं है।
जिले में इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों और निजी स्कूल प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अब सभी की निगाहें जिला शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शासन के निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार झा ने कहा—
“सभी निजी स्कूलों को पाठ्यक्रम के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें ही चलानी होंगी। शासन के नियमों का पालन करना सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य है। यदि कोई विद्यालय संदर्भ सामग्री के रूप में निजी प्रकाशकों की कुछ पुस्तकें रखना चाहता है तो रख सकता है, लेकिन मुख्य पाठ्यपुस्तक एनसीईआरटी की ही होगी। अभिभावक संघ की शिकायत प्राप्त हुई है, मामले की जांच कर विद्यालय प्रबंधन से जानकारी ली जाएगी। केवल अभिभावकों की राय का हवाला देकर नियमों से बचा नहीं जा सकता।”

होली क्रॉस स्कूल की प्राचार्य सिस्टर जेस्सी थक्कन ने कहा—
“विद्यालय में लगभग दस प्रतिशत अभिभावकों की बैठक बुलाई गई थी। कुछ अभिभावकों से राय ली गई, लेकिन सभी से एक साथ अभिमत लेना संभव नहीं है। विद्यालय ने अभी तक इस संबंध में अपना अंतिम अभिमत प्रस्तुत नहीं किया है।”

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