Sarguja express
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत कार्यरत रसोइयों ने कम मानदेय के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। मैनपाट विकासखंड की रसोइयों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरगुजा कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कलेक्टर दर के अनुसार पूर्णकालिक वेतन देने की मांग की है। मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने की स्थिति में रसोईया संघ ने आगामी दिनों में दो दिवसीय हड़ताल करने की घोषणा की है। रसोइयों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह मात्र 2 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद कम है। इतने कम भुगतान में परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन करना संभव नहीं हो पा रहा है। संघ की महिलाओं ने बताया कि वे प्रतिदिन विद्यालय पहुंचकर भोजन तैयार करने, बच्चों को भोजन परोसने, बर्तन साफ करने और अन्य आवश्यक कार्यों का जिम्मा निभाती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
रसोईया संघ की पदाधिकारियों ने कहा कि वे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि रसोइयों को कलेक्टर दर के अनुसार पूर्णकालिक कर्मचारी मानते हुए उचित वेतन दिया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।
संघ की सदस्य श्रीमती ललिता दोहरे, सीता इक्का और सरोज सोनवानी ने कहा कि कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखी गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे रसोइयों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दो दिवसीय हड़ताल के बाद आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।
रसोइयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें लगातार अनसुनी की जाती रहीं तो वे सामूहिक इस्तीफा देने पर भी विचार कर सकती हैं। ऐसे में प्रस्तावित हड़ताल का असर स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना पर पड़ सकता है, जिससे हजारों बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है।
अब सभी की नजर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के रुख पर टिकी हुई है कि हड़ताल से पहले रसोइयों की मांगों का कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।

