Sarguja express….
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के राजापुर उप तहसील में नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित मारपीट के मामले को लेकर शुरू हुआ प्रशासनिक अधिकारियों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार मंगलवार को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे। हड़ताल के दूसरे दिन भी तहसीलों और उप तहसीलों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा, जिससे आम लोगों और राजस्व मामलों के पक्षकारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
अंबिकापुर के कलाकेंद्र मैदान में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का धरना लगातार जारी है। आंदोलनकारी अधिकारियों का कहना है कि जब तक प्रकरण में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। इस आंदोलन को राजस्व निरीक्षक संघ का भी समर्थन प्राप्त है, जिसके चलते सरगुजा जिले के सभी राजस्व निरीक्षक भी कार्य से दूर हैं।
राजापुर उप तहसील में 27 मई को हुए विवाद के बाद नायब तहसीलदार तुषार मानिक की शिकायत पर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं विधायक की चचेरी बहन की शिकायत पर तुषार मानिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस जांच जारी है।
इधर पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने मामले में नया मोड़ लाते हुए उनका और विधायक रामकुमार टोप्पो का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी। तुषार मानिक ने कहा कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर विधायक रामकुमार टोप्पो ने भी बयान जारी कर कहा है कि वे किसी भी प्रकार की जांच और परीक्षण के लिए तैयार हैं तथा जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।
विवाद के बीच विधायक रामकुमार टोप्पो मंगलवार को भी अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रहे। कुछ दिन पहले उन्होंने स्वयं गिरफ्तारी देने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद इस संबंध में कोई नया बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि भाजपा संगठन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर कुछ भाजपा नेता सोशल मीडिया के माध्यम से विधायक के समर्थन में अपनी बात रख रहे हैं।

हड़ताल का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। तहसील न्यायालयों में सुनवाई के लिए आने वाले पक्षकारों की पेशियां आगे बढ़ाई जा रही हैं। नामांतरण, बंटवारा, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख संबंधी कार्य और सीमांकन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो आगामी दिनों में लंबित प्रकरणों की संख्या और बढ़ सकती है।
विशेष चिंता सीमांकन कार्यों को लेकर जताई जा रही है। आगामी 15 जून से बरसात के मौसम को देखते हुए सीमांकन कार्यों पर रोक लग जाएगी। ऐसे में वर्तमान हड़ताल के कारण जिन लोगों के सीमांकन कार्य लंबित हैं, उन्हें और अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि विवादों के समाधान में भी देरी होने की आशंका है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर आंदोलन समाप्त कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। आंदोलनकारी अधिकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और गिरफ्तारी से पहले काम पर लौटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। वहीं आम नागरिकों की नजरें अब शासन और पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
समाधान केवल आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई से ही संभव होगा
कृष्ण कुमार लहरे, प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने कहा कि राजस्व मंत्री और राजस्व सचिव स्तर पर हुई चर्चा में अधिकारियों को आश्वासन तो दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह बताया गया कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन विधायक सहित अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं होने से अधिकारियों में नाराजगी है।
लहरे ने स्पष्ट कहा कि संघ का आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए किया जा रहा है। यदि किसी राजस्व अधिकारी के साथ मारपीट की घटना होती है और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र का मनोबल प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि संघ की प्रमुख मांग आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच है। जब तक इन मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदेशव्यापी हड़ताल जारी रहेगी।
संघ ने यह भी कहा कि आंदोलन के बावजूद आवश्यक संवाद के लिए उसके दरवाजे खुले हैं, लेकिन समाधान केवल आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई से ही संभव होगा।

