Sarguja express (दीपक सराठे )
अंबिकापुर। पर्यावरण संरक्षण और वनों के संवर्धन के उद्देश्य से होली क्रॉस कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल (अंग्रेजी माध्यम), अंबिकापुर में शनिवार को वन महोत्सव का आयोजन किया गया। विद्यालय के इको क्लब एवं लिटरेरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कोरिया जिले की वनमंडलाधिकारी (भारतीय वन सेवा) प्रभाकर टोप्पो थीं। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सी. जेस्सी, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सुबह 8 बजे प्रारंभ हुए इस अभियान के तहत विद्यालय परिसर में मौलसिरी सहित विभिन्न प्रजातियों के लगभग 50 पौधों का रोपण किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रभाकर टोप्पो ने विद्यालय को लाल चंदन और दहिमन के पौधे भेंट किए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि वनों का संरक्षण नहीं किया गया तो ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम चक्र में व्यापक परिवर्तन होंगे और मानव जीवन के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने छात्रों को लाल चंदन के पौधों की विशेषताओं से अवगत कराते हुए बताया कि यह प्रजाति मुख्य रूप से कर्नाटक और पश्चिमी घाट क्षेत्रों में पाई जाती है। वहीं दहिमन पौधे के बारे में उन्होंने कहा कि यह बैकुंठपुर और मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में पाया जाने वाला औषधीय महत्व का पौधा है, जो धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रहा है। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है।
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सी. जेस्सी ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयासों से होती है। विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर न केवल पर्यावरण को शुद्ध करेंगे, बल्कि विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा भी देते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधों की छांव में भविष्य में बच्चे खेलेंगे और इन पौधों को लगाने वाले विद्यार्थियों के प्रयासों को याद करेंगे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने प्रकृति संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने का संकल्प भी लिया।
वन महोत्सव के इस आयोजन में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के संदेश के साथ हुआ।


