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राजपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में पिछले लगभग 10 महीनों से बीएमओ (खंड चिकित्सा अधिकारी) के पद पर कार्यरत डॉ. रमेश जयसवाल को पद से हटा दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया है। वहीं राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए बीएमओ के रूप में डॉ. दीपक गुप्ता को दायित्व सौंपा गया है।
गौरतलब है कि डॉ. रमेश जयसवाल ने 8 सितंबर 2025 को राजपुर बीएमओ का पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर कई बार विभिन्न विवादों और प्रशासनिक मामलों को लेकर चर्चा में रहा। स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों के बीच विवाद, व्यवस्थागत शिकायतें तथा अन्य मुद्दों को लेकर लगातार खबरें सामने आती रही थीं, जिसके कारण उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा।
इसी बीच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए डॉ. जयसवाल को बीएमओ पद से मुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए डॉ. दीपक गुप्ता को राजपुर बीएमओ का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
डॉ. जयसवाल ने जब से राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे बीएमओ के रुप में पदभार ग्रहण किया था तब से वे कई विवादों से घिरे रहे। चाहे वो हरेभरे पेड़ों की कटाई हो,शासकीय पैसे का दूरूपयोग कर अहाता निर्माण हो या कर्मचारियों से द्वेषपूर्ण भाव से थाने में एफआईआर दर्ज करना इसके अलावा उपस्वास्थ्य केन्द्र रेवतपुर में बगैर ड्यूटी किये दो स्टाफ नर्सों का पूर्ण भुगतान कराना या भर्ती मरीजों को दिये जाने वाले गर्म भोजन में वित्तीय अनियमितता करना जैसे आरोप लगते रहे हैं जिस कारण से डॉ. जयसवाल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए राजपुर बीएमओ पद से मुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए हैं।
नए बीएमओ की नियुक्ति के बाद क्षेत्र के लोगों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को उम्मीद है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार होगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। विभागीय आदेश के बाद स्वास्थ्य महकमे में इस बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। साथ ही डॉ. जयसवाल पर लगे आरोपों का जांच अभी लंबित है जिसकी निष्पक्ष जांच की भी मांग अब तेज हो चुकी है।

