Sarguja express…..
महिला शौचालय की हालत बदहाल, सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल; संचालन व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें
अंबिकापुर। शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महिला वार्ड की ओर मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए बनाए गए सार्वजनिक सुलभ शौचालय की स्थिति इन दिनों गंभीर चिंताओं का विषय बनी हुई है। अस्पताल में दूर-दराज क्षेत्रों से उपचार कराने आने वाले मरीजों के परिजनों को रात के समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि अस्पताल परिसर में स्थित सुलभ शौचालय को रात लगभग 9 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है, जबकि अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों की आवाजाही 24 घंटे बनी रहती है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में मौजूद यह सार्वजनिक शौचालय मरीजों के परिजनों की सुविधा के लिए संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद रात के समय ताला लग जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ती है। अस्पताल में रातभर रुकने वाले परिजनों के साथ-साथ उसी भवन में ठहरने वाले 108 आपातकालीन वाहन चालकों को भी इससे असुविधा होती है।
शौचालय की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। शौचालय के कुछ दरवाजे टूट चुके हैं और नियमित साफ-सफाई के अभाव में गंदगी का माहौल बना रहता है। इससे विशेष रूप से महिला मरीजों और उनके परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में अस्पताल प्रबंधन से शिकायत किए जाने के बाद एक-दो दिन सफाई अभियान चलाया गया, लेकिन व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं दिखा। कुछ समय पहले शौचालय परिसर में नई टाइल्स लगाई गई थीं, लेकिन कई स्थानों पर वे उखड़ने लगी हैं, जिससे शौचालय संचालन करने वालों के द्वारा भी देखरेख पर सवाल उठ रहे हैं।
सार्वजनिक शौचालय का संचालन एक दिव्यांग दंपति द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि शौचालय परिसर का उपयोग निजी निवास की तरह किया जा रहा है तथा संचालन व्यवस्था को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
अस्पताल आने वाले लोगों ने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि शौचालय को 24 घंटे खुला रखा जाए तथा नियमित सफाई, सुरक्षा और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
रात में सबसे अधिक होती है परेशानी
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। उनके साथ आए परिजन रातभर अस्पताल परिसर में ही रुकते हैं। ऐसे में रात 9 बजे के बाद सार्वजनिक शौचालय बंद हो जाने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को अस्पताल परिसर से बाहर जाना पड़ता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं।

शिकायतों के बाद भी नहीं सुधर रही व्यवस्था
अस्पताल प्रबंधन को शौचालय की गंदगी, टूटे दरवाजों और खराब रखरखाव को लेकर कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। हाल में शिकायत के बाद सफाई तो कराई गई, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। लोगों का कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है, ताकि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर स्वच्छता और सुविधा की व्यवस्था बनी रहे।

