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अम्बिकापुर। नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों से लगातार पेयजल संकट, आधे घंटे की जगह मात्र 5 से 10 मिनट जलप्रदाय और कई स्थानों पर गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें मिलने के बाद कांग्रेस पार्षदों ने नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले तकिया एवं कतकालो स्थित फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जलापूर्ति व्यवस्था में कई गंभीर तकनीकी खामियां और प्रशासनिक लापरवाहियां सामने आईं।
नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने बताया कि नगर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार बिजली कटौती को जल संकट का प्रमुख कारण बताते रहे हैं। वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्षदों ने दोनों फिल्टर प्लांटों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लॉग बुक एवं मौके की स्थिति देखने पर पता चला कि समस्या केवल बिजली कटौती नहीं, बल्कि प्लांटों के रखरखाव और संचालन में भारी लापरवाही भी है।
निरीक्षण में पाया गया कि तकिया फिल्टर प्लांट की क्षमता 17.5 एमएलडी होने के बावजूद वहां से मात्र 10 से 11 एमएलडी पानी का शोधन एवं वितरण किया जा रहा है। वहीं कतकालो फिल्टर प्लांट की क्षमता 18 एमएलडी है, लेकिन वहां से केवल 12 से 13 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि दोनों प्लांट अपनी क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि प्लांट का एक महत्वपूर्ण पंप लंबे समय से खराब पड़ा है तथा फिल्टर बेड की कई महीनों से सफाई नहीं की गई है, जिसके कारण वहां काई और घास तक जम गई है। जलापूर्ति विशेषज्ञों के अनुसार इससे जल शोधन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है और पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि अनुबंध के अनुसार दोनों प्लांटों में 32 कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में तैनाती होनी चाहिए, जबकि मौके पर तकिया और कतकालो दोनों प्लांटों में कुल मात्र 6 कर्मचारी ही कार्यरत मिले। जल शोधन के लिए उपयोग होने वाले एलम (फिटकरी) का भी पर्याप्त भंडारण नहीं था। नियमानुसार कम से कम तीन महीने का स्टॉक होना चाहिए, जबकि मौके पर केवल तीन से चार दिन का स्टॉक ही उपलब्ध मिला। बरसात के मौसम में नदी का पानी अधिक मटमैला होने से एलम की खपत कई गुना बढ़ जाती है। कांग्रेस ने आशंका जताई कि निर्धारित मात्रा में एलम का उपयोग नहीं किए जाने के कारण ही कई बार गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें सामने आती हैं।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कतकालो फिल्टर प्लांट में कोई उपकरण खराब होने पर उसके पुर्जे पुणे या मुंबई से मंगाने पड़ते हैं, जिससे मरम्मत में कई सप्ताह लग जाते हैं। आश्चर्यजनक रूप से छोटे-छोटे आवश्यक स्पेयर पार्ट्स का भी स्थानीय स्तर पर कोई भंडारण नहीं रखा गया है।
जलापूर्ति विशेषज्ञों ने बताया कि पानी की आपूर्ति कम होने के मुख्य कारणों में फिल्टर बेड की सफाई नहीं होना, तनी फिल्टर प्लांट में कुल छह क्लैरिफ्लोकुलेटर में से एक प्लांट के दोनों और दूसरे का एक क्लैरिफलिकुलेटर लंबे समय से है।कुल छमे से तीन क्लैरिफ्लोकुलेटर का बंद होना, मड पंप का बंद होना, एलम की कमी तथा पर्याप्त तकनीकी स्टाफ का अभाव शामिल हैं। इन कारणों से जल शोधन क्षमता में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ रही है। इसके अलावा बिजली गुल होने की स्थिति में उपलब्ध जनरेटर का उपयोग नहीं किए जाने से भी जलप्रदाय प्रभावित हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने आरोप लगाया कि नगर निगम के सत्तापक्ष की लापरवाही और उदासीनता के कारण शहर की पेयजल व्यवस्था बदहाल हो गई है। क्षमता के अनुरूप जल शोधन एवं जलापूर्ति नहीं होने से हजारों नागरिकों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है, वहीं गंदा पानी मिलने की शिकायतों के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्टर प्लांट में सामने आई अनियमितताएं, रखरखाव में लापरवाही, आवश्यक संसाधनों की कमी और कर्मचारियों की भारी कमी सत्तापक्ष की मिलीभगत और प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। यदि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए होते तो शहरवासियों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
कांग्रेस पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को कलेक्टर से मुलाकात कर निरीक्षण में सामने आई सभी अनियमितताओं से जिला प्रशासन को अवगत कराएगा तथा दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई, फिल्टर प्लांट की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार और शहर में नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करेगा। कांग्रेस पार्षदों के दल में पपिंदर सिंह,हसन खान,जे कुजूर, निम्न राशि एक्का,सुभम जायसवाल, मो बाबर, कलीम खान, मो अख्तर चम्मा,मिला तिर्की, लुकस एक्का सहित सभी पार्षदगण उपस्थित थे।

