Sarguja express…..
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में ज्ञान और रचनात्मकता का संगम, प्रश्नोत्तरी से पोस्टर तक विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा; विजेताओं का हुआ सम्मान
अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के विश्वविद्यालयीन औषधि विभाग में विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर ज्ञान, जागरूकता और रचनात्मकता से भरपूर कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से औषधि सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्ट की भूमिका का संदेश दिया। इस दौरान रोगाणुरोधी प्रतिरोध यानी एएमआर के बढ़ते खतरे को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले रहे। मुख्य अतिथि टुटेजा ब्लड बैंक एवं माता राजरानी हॉस्पिटल के एमडी नरेन्द्र सिंह टुटेजा, विशिष्ट अतिथि सहायक औषधि नियंत्रक सरगुजा किशोर ठाकुर तथा विशेष अतिथि वरिष्ठ फार्मासिस्ट देवा शर्मा एवं महिमत मंडल रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. रोहितास देशमुख सहित डॉ. आनंद कुमार, डॉ. रंजीत हरवंश, डॉ. जुनैद खान, डॉ. खेमकरण अहिरवार, शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी हैं फार्मासिस्ट
नरेन्द्र सिंह टुटेजा ने फार्मासिस्ट को स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए विद्यार्थियों से ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करने का आह्वान किया। किशोर ठाकुर ने दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षित उपयोग और औषधि नियमन के महत्व की जानकारी देते हुए फार्मेसी क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। देवा शर्मा और महिमत मंडल ने अपने अनुभव साझा करते हुए रोगी-केंद्रित सेवाओं में फार्मासिस्ट की जिम्मेदारियां बताईं।
प्रश्नोत्तरी से पोस्टर तक दिखाई प्रतिभा
फार्मा प्रश्नोत्तरी में थकेश्वर एवं समूह प्रथम, रोमन सिद्दीकी एवं समूह द्वितीय और करिश्मा एवं समूह तृतीय रहे। पोस्टर प्रतियोगिता में शुभम एवं चांदनी ने पहला, उत्कर्ष, हरिलाल एवं राहुल ने दूसरा तथा घाटा सिंह ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
साइटून प्रतियोगिता में घाटा सिंह प्रथम, प्रियंका यादव द्वितीय तथा कीर्ति एवं मधुमिता तृतीय रहे। पत्रक निर्माण प्रतियोगिता में अनुराग गुप्ता ने प्रथम, प्रियंशी बड़ा ने द्वितीय और अनुष्का दीप गुप्ता ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचें
विभागाध्यक्ष डॉ. रोहितास देशमुख ने एएमआर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सूक्ष्मजीवों के रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाने से सामान्य संक्रमणों का उपचार भी कठिन हो सकता है। उन्होंने एंटीबायोटिक के अनावश्यक या गलत इस्तेमाल, निर्धारित मात्रा और अवधि का पालन नहीं करने जैसी प्रवृत्तियों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. खेमकरण अहिरवार ने किया, जबकि अंत में डॉ. रंजीत हरवंश ने आभार व्यक्त किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि फार्मासिस्ट की भूमिका दवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित औषधि उपयोग और जनस्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण है।

