Sarguja express…..
रामानुजगंज। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में कई होटल, ढाबों, चाय दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को समोसा, जलेबी, पकौड़ी, पूड़ी-सब्जी, चाय तथा अन्य गर्म खाद्य सामग्री अखबार के कागज में रखकर या लपेटकर परोसने की परंपरा आज भी देखने को मिलती है। हालांकि यह तरीका सुविधाजनक और कम खर्चीला माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत लोगों की सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समाचार पत्रों की छपाई में उपयोग की जाने वाली स्याही में कई प्रकार के रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। जब अत्यधिक गर्म खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आते हैं, तो स्याही और कागज में मौजूद रसायन भोजन में मिल सकते हैं। ऐसे भोजन का लगातार सेवन करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार अखबार का कागज खाद्य सामग्री रखने के लिए तैयार नहीं किया जाता। इसके निर्माण और छपाई के दौरान विभिन्न प्रकार के रसायनों का उपयोग होता है। गर्म तेल या भाप वाले खाद्य पदार्थ इन रसायनों को तेजी से अवशोषित कर लेते हैं, जिससे भोजन दूषित हो सकता है। लंबे समय तक ऐसे दूषित भोजन का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं, पेट दर्द, गैस, अपच, एलर्जी तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। लगातार रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर में विषैले तत्व जमा होने का खतरा रहता है, जो भविष्य में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए खाद्य सामग्री को अखबार में रखने या परोसने से बचना चाहिए।
नगर के जागरूक नागरिकों ने भी इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों को सुविधा के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने होटल एवं नाश्ता केंद्र संचालकों से खाद्य सामग्री परोसने के लिए फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, पेपर प्लेट, पत्तल या अन्य सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करने की अपील की है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने भी समय-समय पर इस संबंध में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि छोटी-सी लापरवाही लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में नागरिकों और व्यापारियों दोनों को इस विषय में सजग रहने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अखबार में गरम-गरम खाद्य सामग्री परोसना या पैक करना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है। यदि इस प्रथा को समय रहते नहीं रोका गया तो लोगों के स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सुरक्षित खाद्य पैकेजिंग अपनाकर ही स्वस्थ समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

