24 October 2026
सरगुजा में जमीन का बड़ा खेल…“पुराने रिकॉर्ड में खसरा ही नहीं, फिर निजी नाम पर कैसे दर्ज हुई जमीन? 5 पर FIR”
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सरगुजा में जमीन का बड़ा खेल…“पुराने रिकॉर्ड में खसरा ही नहीं, फिर निजी नाम पर कैसे दर्ज हुई जमीन? 5 पर FIR”

Sarguja express…..

मैनपाट के केसरा में 3.46 हेक्टेयर शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज कराने का मामला, कमलेश्वरपुर पुलिस ने धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में दर्ज किया अपराध**

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट तहसील अंतर्गत ग्राम केसरा में शासकीय भूमि को कथित रूप से कूटरचना कर निजी नाम पर दर्ज कराने और बाद में उसकी रजिस्ट्री कराने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। तहसीलदार उमेश्वर सिंह बाज की जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना कमलेश्वरपुर में आजाद इराकी समेत पांच लोगों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मामला ग्राम केसरा स्थित खसरा नंबर 1378 की 3.46 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, शासकीय भूमि को राजस्व अभिलेखों में कथित कूटरचना के माध्यम से निजी भूमि के रूप में दर्ज कराया गया। इसके बाद भूमि की रजिस्ट्री भी कराए जाने का आरोप है।

पुराने राजस्व रिकॉर्ड में नहीं था खसरा नंबर

तहसीलदार मैनपाट की जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में अंतिम खसरा नंबर 650 दर्ज था। ऐसे में उस समय के रिकॉर्ड में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि होने पर सवाल उठे हैं। जांच में बताया गया कि खसरा नंबर 1378 पहली बार वर्ष 1995-96 के राजस्व दस्तावेजों में रिनंबरिंग खसरे के रूप में सामने आया।

जांच प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि पुराने अधिकार

अभिलेख में कूटरचना कर उक्त भूमि विजय सिंह, पिता चंद्रचरण सिंह के नाम दर्ज की गई। इसके बाद विजय सिंह के मुख्तार आम दिलीप चिकवा, पिता रामप्रसाद चिरवा तथा तुलेश्वर गुप्ता, पिता गणेश गुप्ता के माध्यम से भूमि की रजिस्ट्री आजाद इराकी, पिता रियाजुद्दीन इराकी और अनुपम कुमार सिंह, पिता रामाशंकर सिंह के नाम किए जाने का उल्लेख है।

 छोटे झाड़ जंगल मद में दर्ज थी शासकीय भूमि

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1995-96 के बंदोबस्त रिकॉर्ड में खसरा नंबर 1378 की भूमि छोटे झाड़ जंगल मद में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। इसी आधार पर पुराने राजस्व अभिलेख में भूमि को निजी नाम पर दर्ज किए जाने की वैधता पर सवाल खड़े हुए हैं।

मामले में वन भूमि के हस्तांतरण को लेकर वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन की ओर से राजस्व अभिलेखों में कथित अवैध प्रविष्टि को विलोपित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

फिलहाल, तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर आजाद इराकी, विजय सिंह, दिलीप चिकवा, तुलेश्वर गुप्ता और अनुपम कुमार सिंह के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका उपयोग करने तथा साझा मंशा से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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