Sarguja express (दीपक सराठे )
बलात्कार-पॉक्सो मामलों में साक्ष्यों की मजबूती पर जोर, पक्षद्रोही बयान और कमजोर विवेचना की होगी समीक्षा; एक साल से लंबित अपराधों के त्वरित निराकरण के निर्देश
अंबिकापुर/कोरिया। न्यायालयों में आरोपियों के दोषमुक्त होने के कारणों की पड़ताल कर दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने के लिए सरगुजा रेंज पुलिस ने समीक्षा तेज कर दी है। पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा ने 23 अक्टूबर को कोरिया जिले में आयोजित संभाग स्तरीय बैठक में जुलाई और अगस्त माह के कुल 791 दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा की। इनमें सेशन न्यायालय के 221 और निचली अदालतों के 570 मामले शामिल हैं। आईजी ने विवेचना की गुणवत्ता, साक्ष्य संकलन और अभियोजन में सामने आने वाली कमियों को दूर कर मामलों को मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रत्येक जिले में दोषमुक्ति के कारणों का नियमित विश्लेषण किया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कमियों के कारण आरोपी न्यायालय से बरी हुए। इसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाकर दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बलात्कार-पॉक्सो मामलों पर विशेष फोकस
बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों में दोषसिद्धि की स्थिति पर चर्चा करते हुए आईजी ने पीड़िता के न्यायालयीन बयान और पूर्व में दर्ज कथनों को विधि के अनुरूप साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में कहा गया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कथन, जिसका समकक्ष प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 में है, को विचारण के दौरान विधिसम्मत तरीके से प्रस्तुत कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
यदि पीड़िता न्यायालय में पूर्व कथन से विपरीत बयान देती है या पक्षद्रोही हो जाती है, तो मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसी तरह, जांच में शिकायत या एफआईआर झूठी पाए जाने पर साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से खात्मा अथवा खारिजी की स्वीकृति लेने की प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
ई-प्रॉसिक्यूशन से दूर होंगी विवेचना की कमियां
आईजी ने निर्देशित किया कि ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से अभियोग पत्र जिला अभियोजन अधिकारी को पर्याप्त समय पहले उपलब्ध कराया जाए। इससे अभियोजन पक्ष को प्रकरणों में मौजूद कमियों और त्रुटियों को समय रहते दूर करने का अवसर मिलेगा। साथ ही सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में घटनास्थल से भौतिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से जुटाने पर जोर दिया गया। ऐसे मामलों में एफएसएल अधिकारियों की उपस्थिति में निरीक्षण, आवश्यक परीक्षण और रिपोर्ट प्राप्त कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
एनडीपीएस मामलों में लापरवाही पर नजर
मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की समीक्षा में सामने आया कि कुछ प्रकरणों में एनडीपीएस एक्ट के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं हो रहा है। इस पर आईजी ने विवेचकों को अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देने और उनके पालन को सुनिश्चित करने के लिए इकाई स्तर पर नियमित रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए। उद्देश्य यह है कि नशे की तस्करी से जुड़े मामलों की विवेचना त्रुटिरहित हो और न्यायालय में तकनीकी खामियों के कारण आरोपियों को लाभ न मिले।
एक साल से लंबित अपराधों का होगा निराकरण
बैठक के दूसरे चरण में आईजी दीपक कुमार झा ने रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की समीक्षा की। एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराधों, खात्मा प्रकरणों और एमआरएम, जीआरएम, एनसीआरपी तथा साइ-ट्रेन पोर्टल पर लंबित मामलों की स्थिति का जायजा लिया गया।
इसके अलावा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्ययोजना, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, नेटग्रिड, ई-समंस और ई-साक्ष्य के उपयोग, प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के प्रशिक्षण तथा पुलिस कार्यालयों में लंबित शिकायतों की समीक्षा की गई। पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
आईजी ने सभी जिलों को लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण करने, तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में सरगुजा के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, कोरिया के पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर, बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, एमसीबी की पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह सहित रेंज के संबंधित अधिकारी और लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।

