Sarguja express
मो.हदीस,
सीतापुर- विकासखंड शिक्षा कार्यालfय सीतापुर में शिक्षकों के सेवा संबंधी कार्यों के एवज में कथित रूप से राशि मांगने और राशि नहीं देने पर प्रकरणों को लंबित रखने की शिकायत ने शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ा दी है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, अंबिकापुर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 24 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के पत्र का हवाला देते हुए कार्यालयीन कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार शिक्षकों से अर्जित अवकाश एवं मेडिकल अवकाश की स्वीकृति तथा वेतन भुगतान जैसे मामलों में महीनों तक विलंब किए जाने और कथित तौर पर राशि की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
इतना ही नहीं, कुछ शिक्षकों के अवकाश आवेदन एवं मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र कार्यालय से गायब होने, आवक-जावक में आवेदन लेने से मना करने तथा परीक्षा अवधि पूरी होने के बाद पात्र शिक्षकों के नियमितीकरण प्रस्ताव उच्च कार्यालय भेजने में अनावश्यक देरी की शिकायत भी की गई है। सर्विस बुक संधारण और जीपीएफ पासबुक/अभिलेखों के अद्यतन में भी कथित रूप से देरी एवं राशि मांगने के आरोप लगाए गए हैं।
*शिकायत सही तो व्यवस्था पर बड़ा सवाल-
जिला शिक्षा अधिकारी ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि इस प्रकार का आचरण कार्यालयीन कार्यों में किया जा रहा है तो यह गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है।
बीईओ को सभी आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए दो दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
अब सवाल सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं है—यदि शिक्षकों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्यालय में सेवा संबंधी सामान्य कार्यों के लिए कथित लेन-देन की शिकायतों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं, बीईओ के जवाब से यह भी स्पष्ट होगा कि इन गंभीर आरोपों के पीछे वास्तविकता क्या है।

