Sarguja express…..
टीबी मुक्त बनने की दहलीज पर बतौली: छत्तीसगढ़ के सिर्फ 4 विकासखंडों में सरगुजा का नाम, अब राज्य स्तरीय टीम करेगी पड़ताल…
हर हजार की आबादी में एक या उससे कम टीबी मरीज का लक्ष्य, गांव-गांव स्क्रीनिंग; एक्स-रे से लेकर आधुनिक जांच तक अभियान तेज

अंबिकापुर। सरगुजा जिले का बतौली विकासखंड टीबी मुक्त क्षेत्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ में टीबी मुक्त विकासखंड की दिशा में चयनित चार विकासखंडों में बतौली को भी शामिल किया गया है। अब यहां किए गए कार्यों और उपलब्धियों का राज्य स्तरीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए मूल्यांकन टीम बतौली पहुंचकर निर्धारित मानकों के आधार पर अभियान की जमीनी हकीकत परखेगी।
बतौली में स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। गांव-गांव में टीबी के संभावित मरीजों की सक्रिय खोज, जोखिम वाले लोगों की स्क्रीनिंग, छाती का एक्स-रे, बलगम की जांच और आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच के माध्यम से बीमारी की जल्द पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
हर हजार आबादी पर एक या उससे कम मरीज का लक्ष्य
टीबी मुक्त क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेतकों में प्रति एक हजार आबादी पर नोटिफाइड टीबी मरीजों की संख्या एक या उससे कम रखना शामिल है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केवल मरीजों की संख्या कम होना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी देखा जाएगा कि क्षेत्र में संभावित मरीजों की पर्याप्त खोज और जांच की गई है या नहीं, ताकि बीमारी के मामले जांच के अभाव में छिपे न रह जाएं।
इसी उद्देश्य से हाई रिस्क आबादी की पहचान कर घर-घर स्क्रीनिंग की जा रही है। टीबी के लक्षण वाले लोगों का एक्स-रे कराया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर बलगम तथा मॉलिक्यूलर जांच भी की जा रही है। टीबी की पुष्टि होते ही मरीज का उपचार शुरू कर नियमित निगरानी की जा रही है।
इलाज की सफलता से लेकर पोषण सहायता तक की होगी पड़ताल
राज्य स्तरीय मूल्यांकन में टीबी नोटिफिकेशन दर के साथ उपचार की सफलता, दवा प्रतिरोध की जांच, मरीजों का नियमित फॉलोअप, पोषण सहायता और अभियान में समुदाय की भागीदारी जैसे बिंदुओं को भी देखा जाएगा। पात्र मरीजों तक पोषण सहायता पहुंचाने और उनका पूरा उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना, कमजोरी या बलगम में खून आने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल टीबी जांच कराने की सलाह दी है।
मितानिन से पंचायत प्रतिनिधि तक मैदान में
बतौली में अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, मितानिनों, स्वास्थ्य एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदाय का सहयोग लिया जा रहा है। मरीजों के साथ भेदभाव रोकने, उपचार बीच में नहीं छोड़ने और मरीज के परिवार तथा निकट संपर्क में रहने वाले लोगों की जांच कराने पर भी जोर है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्देश्य केवल आंकड़ों में टीबी मरीजों की संख्या कम दिखाना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक संभावित मरीजों की जांच कर समय पर बीमारी पकड़ना, उनका पूर्ण उपचार करना और संक्रमण की श्रृंखला तोड़ना है।
बतौली का मूल्यांकन सफल रहने पर यह उपलब्धि पूरे सरगुजा के लिए महत्वपूर्ण होगी। इससे अंबिकापुर, लखनपुर, लुंड्रा, उदयपुर, मैनपाट और सीतापुर में भी टीबी उन्मूलन अभियान को और गति मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि टीबी के लक्षण न छिपाएं और जांच कराने से न डरें। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

