24 August 2026
त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट : परवेज आलम गांधी
देश प्रतिक्रिया बयान मांग राजनीति राज्य

त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट : परवेज आलम गांधी

Sarguja express……

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और देश में घटते चीनी भंडार को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस देश को दुनिया का प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक होने का गौरव हासिल है, वहां आज चीनी का स्टॉक चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाना और विदेश से चीनी आयात करने की नौबत आना मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को उजागर करता है।

परवेज गांधी ने कहा कि त्योहारों की मिठास पर महंगाई की मार पड़ रही है। चीनी की कीमतों में बीते कुछ महीनों में हुई तेज बढ़ोतरी ने आम आदमी, गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, मिठाई कारोबारियों और छोटे दुकानदारों का बजट बिगाड़ दिया है। सवाल यह है कि जब सरकार को इस संकट का पहले से अंदाजा था, तो समय रहते पर्याप्त स्टॉक क्यों नहीं बनाया गया?

उन्होंने केंद्र सरकार से तीन सीधे सवाल पूछे। पहला—भारत में चीनी का स्टॉक वर्षों के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया और सरकार को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का फैसला क्यों करना पड़ा? दूसरा—चीनी की कीमतों में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी की जिम्मेदारी कौन लेगा? और तीसरा—जब देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर सरकार को विदेश से चीनी मंगानी पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज को Ethanol उत्पादन में लगाने वाली E20 नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है?

कांग्रेस नेता ने कहा कि एक तरफ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा, दूसरी तरफ चीनी का आयात—यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है? सरकार की नीतियों का असर अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जनता की रसोई और त्योहारों की थाली तक दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की फसल का इस्तेमाल किस अनुपात में चीनी और Ethanol उत्पादन में हो, इसका फैसला केवल पेट्रोल में मिश्रण का लक्ष्य देखकर नहीं किया जा सकता। देश की खाद्य सुरक्षा, चीनी की उपलब्धता, किसानों की आय और आम उपभोक्ता की जेब को भी बराबर महत्व देना होगा।

परवेज आलम गांधी ने कहा कि सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी और नारों से बाहर निकलकर जनता को जवाब देना चाहिए। पहले उत्पादन और स्टॉक का संकट, फिर कीमतों में उछाल और अब विदेश से आयात—आखिर यह किसकी नीति और किसकी नाकामी है?
सरगुजा जिला प्रशासन जमाखोरी करने वाले के ख़िलाफ़ सख़्त करवाई करे।
अंबिकापुर में भी 70 रुपये किलो चीनी मिल रही हैं।

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार चीनी की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण के उपाय करे, पर्याप्त घरेलू स्टॉक सुनिश्चित करे और E20 नीति के खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव की तत्काल समीक्षा करे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *