26 July 2026
मदननगर खदान बवाल….. प्रतापपुर थाने में तीन अलग अलग एफआईआर में डेढ दर्जन नामजद सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज
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मदननगर खदान बवाल….. प्रतापपुर थाने में तीन अलग अलग एफआईआर में डेढ दर्जन नामजद सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज

Sarguja express
अंबिकापुर.
सूरजपुर एसईसीएल भटगांव के महान फोर मदननगर खदान की अधिग्रहित भूमि के सीमांकन को लेकर शुक्रवार को पुलिस कर्मियों और ग्रामीणों की हुई हिंसक झड़प के बाद फोर्स पीछे हट गई है।शुक्रवार को बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को लेकर खदान के सीमांकन के प्रयास के दौरान ग्रामीण उग्र हो गए और फिर लाठी डंडा टांगी तब्बल से लैस ग्रामीणों ने पुलिस फोर्स पर धावा बोल दिया।ग्रामीणों को उग्र होता देख पुलिस बल को मौके से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।इस घटना में दो दर्जन पुलिस अधिकारी, कर्मियों को चोटे आई है वही ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों के वाहनों में जमकर तोड़ फोड़ कर खूब उपद्रव मचाया है। घायल पुलिस कर्मियों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज सहित प्रतापपुर चिकित्सालय में उपचार के लिए दाखिल कराया गया है सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।घटना के बाद पूरे दिन मदननगर प्रतापपुर क्षेत्र में तनाव के हालत बने रहे।पुलिस फोर्स के वापस होने के बाद ग्रामीणों ने प्रतापपुर मार्ग को दोपहर बाद आवाजाही के लिए खोल दिया है।कल की घटना के बाद पुलिस बैकफुट पर दिख रही है।इस मामले में प्रतापपुर थाने में अठारह नामजद प्रदर्शनकारी सहित अन्य ग्रामीणों के खिलाफ देर रात विभिन्न धाराओं में तीन अलग अलग एफआईआर दर्ज किया गया है।जिसमें एक एफआईआर एसईसीएल भटगांव के कर्मचारी कृष्ण मुरारी सिंह की ओर से जबकि दो अन्य एफआईआर खड़गवां चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक सरफराज फिरदौसी,निरीक्षक अलरिक लकड़ा की ओर से दर्ज कराया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि मदननगर खदान के सीमांकन कार्य को लेकर एसईसीएल प्रबंधन राजस्व अमला पूर्व नियोजित तैयारी के तहत प्रतापपुर पहुंचा था ।बताया जाता है कि इसके पूर्व भी खदान के सीमांकन कार्य को लेकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले ग्रामीणों को पुलिस चुपचाप उनके घर दबिश देकर उन्हें उठाने की योजना के तहत भोर में ही ग्रामीणों के दरवाजे खटखटा लोगो को घर से उठा अपने साथ पुलिस जिप में बैठाने लगी सुबह होते होते ये बात पूरे गांव में फैल गई कि आज खदान का सीमांकन होना है इसलिए पुलिस लोगो को उठा अपने कब्जे में लेने का प्रयास कर रही है जिसके बाद ग्रामीण उग्र हो गए और धीरे धीरे हर घर से लोग लाठी डंडा लेकर सड़क पर निकल पड़े इसी बीच करीब सात बजे जब बड़ी संख्या में फोर्स तैयारी के साथ गांव की ओर बढ़ रही थी तभी ग्रामीण आक्रमक हो गए और फिर धक्का मुक्की के बाद दोनों ओर से लाठी डंडे पत्थर चलने लगे।घटना में दो दर्जन पुलिस कर्मी घायल हो गए वही आसपास खड़ी पुलिस की वाहन सहित जिन बसों में पुलिस के जवान घटना स्थल पहुंचे थे उन बसों को भी ग्रामीणों ने निशाना बना तोड़ फोड़ किया और सड़क जाम कर वही बैठ गए ।ग्रामीणों को अधिक उग्र होता देख पुलिस को पीछे हटना पड़ा,इस दौरान कई महिला और पुरुष जवान बदहवास भागते दिखे।घटना की सूचना पर कलेक्टर एसपी भी मौके पर पहुंच वस्तुस्थिति से अवगत हुए।दिन भर जवानों को प्रतापपुर में ही रोका गया अब धीरे धीरे जवानों को वापस किया जा रहा है।वही दूसरे दिन ग्रामीण गांव में बैठक कर आगे की रणनीति तैयार कर रहे है।पुलिस गांव के सरपंच के पुत्र को दूसरे दिन भी प्रतापपुर थाने में बैठा कर रखी हुई है।

मुआवजा राशि को लेकर ग्रामीणों में असंतोष

बताया जाता है कि भटगांव क्षेत्र की प्रस्तावित मदननगर खदान महान फोर के नाम से खोला जाना प्रस्तावित है।इस खदान से प्रतिवर्ष 120 लाख टन कोयला का उत्पादन होगा।इस परियोजना में लगभग 1136 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है इसके एवज में कंपनी प्रभावित परिवारों को 256 करोड़ का मुआवजा राशि वितरित करेगी। खदान में मदननगर की 633 हेक्टेयर कनक नगर की 147 हेक्टेयर, जगन्नाथपुर की161 हेक्टेयर बलरामपुर जिले की चौरा की 195 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण एसईसीएल प्रबंधन ने किया है।मदननगर की 633 हेक्टेयर निजी भूमि के एवज में 135करोड़,कनक नगर की 147 हेक्टेयर निजी भूमि के लिए 33 करोड़, जगन्नाथपुर की 161 हेक्टेयर निजी भूमि के एवज में 34 करोड़ एवं चौरा की 195 हेक्टेयर निजी भूमि के एवज में 54 करोड़ का मुआवजा राशि का भुगतना किया जाना प्रस्तावित है।ग्रामीणों का आरोप है कि आठ लाख एकड़ के हिसाब से उनकी बेशकीमती जमीन प्रबंधन हथियाना चाहती है जो उन्हें मंजूर नहीं है।बताया जाता है कि कई ग्रामीणों ने प्रबंधन से अब तक चुपचाप मुआवजा राशि प्राप्त कर लिया है जबकि मदननगर की बड़ी आबादी शुरू से इस बड़ी परियोजना का विरोध कर रही है।ग्रामीणों के विरोध के आगे खदान अब तक शुरू नहीं हो पाई है।करीब बारह मिलियन टन सालाना उत्पादन वाली खदान को लेकर ग्रामीणों की व्याप्त शंका समस्याओं को लेकर प्रबंधन भी अब तक गंभीर पहल नहीं कर पाई है जो विवाद का बड़ा कारण बताया जा रहा है।

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