3 June 2026
बिहान योजना में लाखों रुपये के गबन का आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग….पीआरपी, संकुल लेखापाल और कैडरों पर स्वयं सहायता समूहों की राशि में अनियमितता के आरोप
अनियमितता आरोप प्रशासन मांग राज्य विरोध शिकायत

बिहान योजना में लाखों रुपये के गबन का आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग….पीआरपी, संकुल लेखापाल और कैडरों पर स्वयं सहायता समूहों की राशि में अनियमितता के आरोप

Sarguja express…..

अंबिकापुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत मैनपाट विकासखंड में संचालित स्वयं सहायता समूहों की राशि में कथित अनियमितता और गबन का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बरिमा सहित विभिन्न गांवों की महिलाओं और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मैनपाट क्षेत्र में कार्यरत संकुल पीआरपी (पंचायत रिसोर्स पर्सन) द्वारा स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों तथा बैंक लिंकेज योजनाओं के तहत प्राप्त राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि अशिक्षित और गरीब महिलाओं को गुमराह कर विभिन्न योजनाओं के नाम पर राशि निकाली गई, जिसका सही उपयोग नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत नर्मदापुर, कुनिया, कुदारीडीह तथा अन्य क्षेत्रों के कई स्वयं सहायता समूहों के बैंक लिंकेज ऋण, सूक्ष्म ऋण योजना (एमसीपी) और सीसीएल ऋण की राशि का दुरुपयोग किया गया है। शिकायत पत्र में कई समूहों के नाम और कथित रूप से ली गई राशि का भी उल्लेख किया गया है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित पीआरपी का कार्यक्षेत्र और निवास क्षेत्र एक ही होने के बावजूद उन्हें पदस्थ किया गया है, जो मिशन के नियमों के विपरीत है। स्थानीय होने का लाभ उठाकर समूह की महिलाओं पर दबाव बनाने और वित्तीय मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपनी जमा राशि और ऋण संबंधी लेन-देन की जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कुछ मामलों में राशि वापस नहीं किए जाने की भी शिकायत की गई है। इसके अलावा सक्रिय महिलाओं के नाम पर मानदेय निकालने और राशि के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की जांच जनपद या जिला स्तर के संबंधित अधिकारियों के बजाय किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो और वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। साथ ही कथित वित्तीय अनियमितताओं में शामिल पीआरपी, संकुल लेखापाल एवं संबंधित कैडरों की भूमिका की भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।

ग्रामीण महिलाओं ने कहा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो स्वयं सहायता समूहों की राशि से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर समूहों की महिलाओं को न्याय दिलाने की मांग की है।
फिलहाल शिकायत पत्र प्रशासन को सौंप दिया गया है। अब जिला प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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