14 June 2026
सरगुजा में जमीन दलाली का काला खेल उजागर, 1 लाख में 3 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का आरोप
आरोप राज्य शिकायत

सरगुजा में जमीन दलाली का काला खेल उजागर, 1 लाख में 3 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का आरोप

Sarguja express

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में इन दिनों जमीन दलाली का काला कारोबार तेजी से फैलता नजर आ रहा है। भोले-भाले आदिवासी ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन हड़पने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम चांदो से सामने आया है, जहां एक 60 वर्षीय आदिवासी वृद्ध की करीब तीन एकड़ जमीन कथित रूप से महज एक लाख रुपये में फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा ली गई।
जानकारी के अनुसार ग्राम चांदो निवासी मसत राम मझवार अपनी निजी जरूरतों के चलते अपनी एक एकड़ जमीन बेचना चाहता था। इसी दौरान गांव के ही राजेश मझवार के माध्यम से उसकी मुलाकात कयामुद्दीन अंसारी नामक व्यक्ति से हुई, जो जमीन खरीद-बिक्री का काम करता है। आरोप है कि बातचीत के दौरान एक एकड़ जमीन का सौदा दो लाख रुपये में तय हुआ था।
बताया जा रहा है कि जमीन देखने के बाद अगले दिन कयामुद्दीन अंसारी सीतापुर के एक दंपति को लेकर मसत राम के घर पहुंचा। मसत राम कम पढ़ा-लिखा होने के कारण उसे केवल एक लाख रुपये दिए गए और बाकी रकम बाद में देने का आश्वासन दिया गया। आरोप है कि इसी बीच उसके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर कई बैंकों के चक्कर कटवाए गए तथा कई सरकारी कागजातों पर बिना पूरी जानकारी दिए हस्ताक्षर करा लिए गए।
वृद्ध का कहना है कि रात के अंधेरे में जमीन के पास ले जाकर उसकी फोटो खींची गई और आनन-फानन में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। बाद में रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि एक एकड़ की बजाय उसकी पूरी तीन एकड़ जमीन का नामांतरण हो चुका है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मसत राम ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि उसके साथ धोखाधड़ी कर उसकी मेहनत की जमीन हड़प ली गई। इसके बाद उसने ग्राम सरपंच के साथ सरगुजा एसएसपी और आईजी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी है।
इस संबंध में राजेश मझवार ने बताया कि गांव में अंडा बिक्री करने वाले कयामुद्दीन अंसारी से उसकी पहचान थी और उसी के कहने पर उसने मसत राम की जानकारी दी थी। वहीं, इस मामले में कयामुद्दीन अंसारी और जमीन खरीदने वाले पक्ष से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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