Sarguja express
अंबिकापुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, अंबिकापुर के बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के तहत प्रगतिशील कृषक आकांक्षा तिर्की के खेत में जीरो एनर्जी कूल चैंबर (शून्य ऊर्जा शीत भंडार गृह) का सफल निर्माण एवं प्रदर्शन किया। इस तकनीक से बिना बिजली के फल एवं सब्जियों को लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता एस.के. सिन्हा के नेतृत्व तथा रावे कार्यक्रम समन्वयक एस.आर. दुबौलिया के मार्गदर्शन में किया गया।
विद्यार्थियों ने ईंट, रेत और बांस जैसी स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर कम लागत वाला शीत भंडार गृह तैयार किया। खेत के समीप निर्मित इस संरचना में कटाई के बाद फल एवं सब्जियों को सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे बाजार तक पहुंचने से पहले होने वाली क्षति में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अमरूद के फलों को कूल चैंबर में रखकर इसकी उपयोगिता का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। साथ ही किसानों को चैंबर की संरचना, जल छिड़काव की विधि और वाष्पीकरणीय शीतलन (इवैपोरेटिव कूलिंग) के सिद्धांत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह तकनीक 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा 90 से 95 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखती है, जिससे फल एवं सब्जियों की गुणवत्ता और भंडारण अवधि बढ़ जाती है।
किसानों ने इस तकनीक को कम लागत में उपज संरक्षण का प्रभावी एवं उपयोगी उपाय बताते हुए इसकी सराहना की। वहीं विद्यार्थियों के लिए यह गतिविधि व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हुई।

