26 May 2024
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला… बी एड पास सहायक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द,  6 सप्ताह के भीतर बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति निरस्त कर, डीएलएड पास अभ्यर्थियों की पुनरीक्षित चयन सूची बनाने के निर्देश…सहायक शिक्षकों के लिए सिर्फ डीएलएड ही मान्य
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला… बी एड पास सहायक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द,  6 सप्ताह के भीतर बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति निरस्त कर, डीएलएड पास अभ्यर्थियों की पुनरीक्षित चयन सूची बनाने के निर्देश…सहायक शिक्षकों के लिए सिर्फ डीएलएड ही मान्य

रायपुर । बीएड पास शिक्षक अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। प्राथमिक शिक्षक के तौर बीएड पास अभ्यर्थियों की दावेदारी खत्म हो गयी। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बीएड उत्तीर्ण सहायक शिक्षकों की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राथमिक शिक्षकों के लिए केवल डीएड पास अभ्यर्थी ही मान्य होंगे। कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि वैसे Bed उत्तीर्ण सहायक शिक्षक, जिनकी ज्वाइनिंग हो चुकी है, उनकी नियुक्ति निरस्त करते हुए 6 सप्ताह में केवल डीएलएड पास अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाये। कोर्ट ने डीएलएड अभ्यर्थियों को शामिल कर पुनरीक्षित चयन सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।

न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षकों के लिए डीएलएड को ही मान्य करते हुए, बीएड को अमान्य किया हैं। राज्य शासन ने दिनाँक 4 मई 2023 को सहायक शिक्षकों की भर्ती विज्ञापन जारी किया था। जिसके तहत डीएलएड के साथ बीएड योग्यताधारी को भी सहायक शिक्षक की भर्ती के लिए आवेदन का योग्य माना था। डीएलएड उत्तीर्ण शिक्षकों ने सेवा भर्ती नियम और विज्ञापन को इस आधार पर चुनौती दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार प्राथमिक शिक्षकों के लिए बीएड अमान्य हैं।

सहायक शिक्षकों के लिए सिर्फ डीएलड ही मान्य हैं। सुनवाई पाश्चात्य उच्च न्यायालय ने बीएड bed अभ्यर्थी की काउंसिलिंग पर पर रोक लगा दी। जिसे अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए बीएड शिक्षकों को भी अंतरिम रूप से नियुक्ति देने का निर्देश दिया, लेकिन उनकी नियुक्ति को हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण के अंतिम निर्णय के अधीन रखा था।

दिनांक 29 फरवरी 2024 को प्रकरण में अंतिम सुनवाई हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने प्रकरण निर्णय के लिए सुरक्षित कर लिया। आज 2 अप्रैल 2024 को निर्णय सुनाया गया, जिसमें बीएड योग्यताधारी को अपात्र मानते हुए उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गयी है। साथ ही 6 हफ्ते में डीएल योग्यताधारी की पुनरीक्षित चयन सूची बनाने का निर्देश दिया । याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता मिनाक्षी अरोरा, अनुराग दयाल, अजय श्रीवास्तव, इशान वर्मा ने पक्ष रखा।

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