13 June 2024
सरगुजा में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं…प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर नहीं पहुंची स्टाफ नर्स… जमीन पर गांव की दाई ने कराया प्रसव,,,,लगभग 1 घंटे तक तड़पती रही आदिवासी गर्भवती महिला
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सरगुजा में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं…प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर नहीं पहुंची स्टाफ नर्स… जमीन पर गांव की दाई ने कराया प्रसव,,,,लगभग 1 घंटे तक तड़पती रही आदिवासी गर्भवती महिला

अम्बिकापुर। ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोल दिए गए हैं और वहां स्टाफ की नियुक्ति भी कर दी गई है परंतु वहां पदस्थ लोगों की लापरवाही कहें या फिर मनमौजी.. उन क्षेत्रों में आज भी पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ परेशानी ही झेलनी पड़ रही है। ताजा मामला शहर से महज कुछ ही किलोमीटर दूर दरिमा क्षेत्र के नवानगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। शनिवार की सुबह 9:00 बजे क्षेत्र की मितानिन एक प्रसव पीड़िता को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। दर्द से कराह रही प्रसव पीड़िता की तकलीफ़ उसे वक्त और ज्यादा बढ़ गई जब उसने अस्पताल के हालात को देखा। अस्पताल में ना तो डॉक्टर मौजूद थे और ना ही स्टाफ नर्स। दवाइयां का काउंटर भी कर्मचारी विहीन दिखा। मितानिन कई जगह फोन करती रही परंतु कोई भी जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा। आखिरकार अस्पताल के अंदर ही जमीन पर गांव की दाई के सहारे तड़प रही प्रसव पीड़िता का प्रसव कराया गया। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र के लिए यह बड़ी घटना वहां के स्वास्थ्य सुविधाओं को अंगूठा दिखाने के लिए काफी है।

जानकारी के अनुसार दरिमा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नवानगर निवासी गर्भवती महिला प्रियावती पैकरा उम्र 25 वर्ष पति राजकुमार पैकरा को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार की सुबह लगभग 9 बजे से पहले क्षेत्र की मितानिन राजकुमारी सिंह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवानगर लेकर पहुंची थी। दर्द से तड़प रही महिला को लेकर जब मितानिन स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो अस्पताल तो खुला मिला परंतु ना तो वहां डॉक्टर मौजूद थे और ना ही कोई स्टाफ नर्स। यही नहीं दवा वितरण कक्ष भी खाली था। अस्पताल में कोई स्टाफ नहीं होने और दूसरी ओर प्रसव पीड़िता के दर्द से कराहने को देखते हुए मितानिन ने कई जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाया परंतु समय रहते कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या फिर वहां पदस्थ स्टाफ नर्स और डॉक्टर मौके पर पहुंचे। दर्द से तड़पती महिला की स्थिति खराब होती जा रही थी। किसी तरह अस्पताल के अंदर खुली जमीन पर महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा तो बाहर निकल गया परंतु प्रसव पीड़िता का पेट पूरी तरह से साफ नहीं हो सका था। इससे बच्चे और महिला दोनों की जान को खतरा बढ़ चुका था। बच्चों की सांस भी रख सकती थी।अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की अवस्था को देखते हुए प्रसव पीड़िता के परिजन गांव से दाई को बुलाकर लाए। लगभग 1 घंटे तक तड़पती गर्भवती महिला का गांव की ही दाई ने पेट की सफाई कर महिला को दर्द से राहत दी।

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