28 May 2024
प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला आयोजन,’सरगुजा नाचे’.. की धुन पर थिरका देश के विभिन्न हिस्सों से मैनपाट पहुंचा 70 सदस्यीय घुमक्कड़ों का दल.. सभी ने यहां की प्राकृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक तथा सांस्कृतिक धरोहरों को कैमरे में किया कैद
आयोजन ख़बर जरा हटके राज्य

प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला आयोजन,’सरगुजा नाचे’.. की धुन पर थिरका देश के विभिन्न हिस्सों से मैनपाट पहुंचा 70 सदस्यीय घुमक्कड़ों का दल.. सभी ने यहां की प्राकृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक तथा सांस्कृतिक धरोहरों को कैमरे में किया कैद

मैनपाट।छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवम घुम्मक्कड़ी दिल से (जीडीएस) छत्तीसगढ़ चैप्टर के संयुक्त तत्वाधान में में 22–23 जुलाई 2023 को छत्तीसगढ़ के बौद्ध तीर्थ तथा शिमला के नाम से प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट में दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ ।

सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों हरिद्वार (उत्तराखंड), सोनीपत, दिल्ली, हरियाणा, देहरादून, दिल्ली, गुड़गांव, केरल, भोपाल, उज्जैन, रांची, हजारीबाग, झुमरी तलैया, कानपुर, मिर्जापुर, भोपाल, उज्जैन, पन्ना, बक्सर, प्रयागराज, तालबेहट, हिमाचल प्रदेश, गढ़वाल, गाजियाबाद, उड़ीसा, अनूपपुर, रायपुर, दुर्ग, भिलाई, जगदलपुर, राजनांदगांव, अम्बिकापुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 70 सदस्यों से अधिक घुमक्कड़ो/ब्लॉगर/यू ट्यूबर/फोटोग्राफर/पर्वतारोही और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया।प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला आयोजन है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ में पर्यटन (ईको पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन तथा जनजातीय) को बढ़ावा देना तथा प्रदेश की नैसर्गिक सुंदरता को दुनिया के सामने लाना है। सम्मेलन के दौरान सभी अतिथियों ने सरगुजा के पर्यटन स्थलों को करीब से देखा, यहाँ की संस्कृति तथा खानपान को जाना। आयोजन के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अतिथियों का भव्य स्वागत स्थानीय करमा नृत्य से किया गया तथा सभी अतिथियों को स्थानीय पारंपरिक भोजन करील, पुटू आदि परोसा गया जिसका सभी अतिथियों ने भरपूर आनंद लिया !
सम्मिलन के दौरान सभी अतिथियों ने मैनपाट के बौद्ध विहार सहित विभिन्न प्राकृतिक स्थलों, सनसेट प्वाइंट परपटिया, मछली प्वाइंट, टाइगर प्वाइंट, मेहता पॉइंट सहित प्रकृति के आश्चर्यों जैसे ठीनठीनी पत्थर जिससे मधुर संगीत निकलती है, उल्टा पानी जहां पानी नीचे से ऊपर की ओर बहता है तथा दलदली जहां चलने से धरती में कम्पन होता है आदि का अवलोकन किया जिसके बारे में अंबिकापुर के जयेश वर्मा ने अतिथियों को विस्तार से जानकारी दी ! सभी ने मैनपाट के नैसर्गिक सौंदर्य को अपने कैमरों में कैद किया तथा यहां बार बार आने की इच्छा जाहिर की।
सम्मेलन के प्रथम दिवस परिचय सत्र एवम सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ श्रीमती गोपा सान्याल द्वारा भगवान शंकर के लिंगाष्टक पाठ से हुआ । सांध्यकालीन सभा में दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम छत्तीसगढ़ पर्यटन के अधिकारी एवम शैला रिजॉर्ट के प्रबंधक श्री सौरभ वर्मा सहित हरिद्वार (उत्तराखण्ड) के पंकज शर्मा, सोनीपत, हरियाणा के संजय कौशिक, पन्ना के मुकेश पाण्डे के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ और छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत की प्रस्तुति हुई ! परिचय सत्र के दौरान पन्ना से आए श्री मुकेश पाण्डेय चंदन ने बताया कि जीडीएस की स्थापना वर्ष 2015 में की गई जो देशभर के घुम्मक्कड़ो का एक विशाल परिवार है , इसमे देश विदेश की जानकरी घर बैठे मिल जाती है कहीं घूमना हो तो उसके बारे में लोग सटीक सलाह भी देते हैं किसी भी स्थान पर इसके सदस्य मदद को तैयार रहते हैं । उन्होंने बताया कि हमारा ग्रुप ‘घुमक्कड़ी दिल से’ हर साल देश की कम जानी-पहचानी मगर बेहद खूबसूरत जगहों पर मीट आयोजित करता आ रहा है । ओरछा (मप्र), रांसी (उत्तराखंड), महेश्वर (मप्र), पन्ना (मप्र) के बाद अब प्रकृति का दुलारा और धान का कटोरा कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट में सम्मलेन आयोजित किया गया । जीडीएस के संस्थापक सदस्यों में एक प्रकाश यादव ने अस्वस्थ रहते हुए भी वीडियो संदेश के माध्यम से सभी अतिथियों का स्वागत किया।
आयोजन के स्थान चयन तथा उद्देश्यों को संक्षिप्त में बताते हुए रायपुर के ज्ञानेंद्र पांडेय ने अतिथियों को बताया कि यह आयोजन राज्य के बाहर पर्यटकों को यह संदेश देना है कि छत्तीसगढ़ एक शांत, सांस्कृतिक विविधताओं से संपन्न, आतिथ्य को सर्वोपरि रखने वाला, प्राकृतिक सुंदरताओं से संपन्न तथा खानपान के विविध रंगों से संपन्न राज्य है भिलाई से आए राइडर एवं पर्वतारोही बृजबिहारी मिश्र ने सम्मेलन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन से हम देश विदेश के सभी पर्यटकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ एक शांत, सुरक्षित तथा खूबसूरत राज्य है, इससे प्रदेश से संबंधित सभी भ्रांतियां दूर होंगी और अधिक से अधिक पर्यटक छत्तीसगढ़ आकर यहां की नैसर्गिक सुंदरता एवम विविध संस्कृति की झलक देख सकेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को पर्यटन के नक्शे पर राष्ट्रीय एवम अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना है।
सांस्कृतिक संध्या में अंबिकापुर के सुरेंद्र तिवारी द्वारा सबका स्वागत किया गया और अपने गानों से उनके द्वारा , नाजिम खान और उज्जैन, अनुपपुर और अन्य स्थानों के अतिथियों द्वारा प्रस्तुति दी गई अम्बिकापुर के कवि डॉ. योगेन्द्र सिंह गहरवार द्वारा घुमक्कड़ो पर यादगार कविता पाठ किया गया, बाबू भाई द्वारा वायलिन वादन सहित अन्य सदस्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी और पधारे सभी लोग स्थानीय गीत सरगुजा नाचे में खूब थिरके, संदीप गुप्ता द्वारा विभिन्न खेल पश्चात् पुरूस्कार वितरण किया गया और सबको प्रमाण पत्र वितरण पश्चात् मैनपाट के कमलेश सिंह द्वारा आभार ज्ञापित किया गया ।

जीडीएस सम्मेलन के ऐतिहासिक एवम सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, आयोजन समिति के छत्तीसगढ़ जी डी एस प्रमुख बृज बिहारी मिश्रा, अनूप नायक, अंबिकापुर के जयेश वर्मा, सुरेंद्र तिवारी, संदीप गुप्ता, सैयद अख्तर हुसैन, कमलेश सिंह, , आलोक दुबे, डॉ हिमांशु गुप्ता, डॉ इति चतुर्वेदी, ईश्वर पटेल, नाजिम खान, बीनू मथाई, शलभ गुप्ता आदि ने सम्मेलन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्मेलन के अंतिम सत्र में सभी अतिथियों द्वारा शैला रिजॉर्ट परिसर में वृक्षारोपण किया। प्रतिभागिता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के पश्चात सभी घुमक्कड़ साथियों ने जीडीएस के स्लोगन “घुमक्कड़ी दिल से.. मिलेंगे फिर से..के जयघोष के साथ नम आंखों से एक दूसरे से विदाई लेते हुए आयोजन और छत्तीसगढ़ के आतिथ्य सत्कार की मुक्त कंठ से सराहना की..!

बारिश के खुशनुमा मौसम में छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला खूबसूरत हिल स्टेशन मैनपाट इन दिनों सुंदरता के पूरे शबाब पर

इस सम्मेलन में पहुँची दूरदर्शन की पत्रकार गोपा सान्याल जिनकी स्कूलिंग अम्बिकापुर के होली क्रास से शुरू हुई थी व निवास मुखर्जी कालोनी जोड़ा तालाब के सामने अम्बिकापुर था। उनके शब्दो मे….बारिश के खुशनुमा मौसम में छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला खूबसूरत हिल स्टेशन मैनपाट इन दिनों सुंदरता के पूरे शबाब पर है।
अब तक हम केवल परिवार के साथ यायावरी करते रहे ।इस बार “घुमक्कड़ी दिल से” ग्रुप के देश भर से आये 70 सदस्यों के परिवार के साथ घूमने का सुखद अवसर मिला।लगा ही नहीं कि सब पहली मिल रहे हैं।इस बार की मेज़बानी छत्तीसगढ़ के टीम ने की। इस पूरे आयोजन का उद्देश्य छग के पर्यटन को बढ़ावा देना साथ ही यहाँ की संस्कृति और खानपान को देश के लोगों तक पहुंचाना था।छग पर्यटन विभाग के शैला रिसोर्ट में सावन के फुहारों के बीच आदिवासी शैला नृत्य के साथ सभी का स्वागत हुआ।हँसी ठिठोली के बीच विभिन्न लोकेशन में घूमना हुआ।इसके अलावा सुबह से रात तक GDS के सदस्यों द्वारा तरह तरह के स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ और फिर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ।प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए नाशपाती के पौधे भी रोपे गए। GDS की छत्तीसगढ़ टीम के शानदार और व्यवस्थित आयोजन से घुमक्कड़ी यादगार बन गई।

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