28 May 2024
चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पी.के. सिन्हा ने कहा …रहें सावधान…टेटू (गोदना) का युवाओं में प्रचलन बढ़ा… प्रयुक्त असुरक्षित सुई का उपयोग बन सकता है एचआईव्ही संक्रमण का कारण
आयोजन राज्य स्वास्थ

चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पी.के. सिन्हा ने कहा …रहें सावधान…टेटू (गोदना) का युवाओं में प्रचलन बढ़ा… प्रयुक्त असुरक्षित सुई का उपयोग बन सकता है एचआईव्ही संक्रमण का कारण

इंजीनियरिंग कॉलेज में रेड रिबन क्लब के द्वारा एचआईव्ही पर कार्यशाला का आयोजन

अम्बिकापुर। विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज अम्बिकापुर के सभागार में रेड रिबन क्लब द्वारा छात्रों में एचआईव्ही के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. पी.के. सिन्हा जिला एडस सोसायटी के नोडल व पिरामल फाउन्डेशन के जिला समन्वयक महेन्द्र तिवारी ने व्याख्यान दिया।

डॉ. पी.के. सिन्हा ने एचआईव्ही बिमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी, एचआईव्ही संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त को बढ़ाने से व असुरक्षित यौन संबंध से होता है। सिफलिस, गोनोरिया, जनन अंगो में छाला या मवाद बनने की बिमारी में एचआईव्ही होने की संभावना ज्यादा रहती है वर्तमान में इन्जेक्शन के नशा का उपयोग नशा लेने के लिये युवा बहुतायत करते है जिसमें एक इन्जेक्शन से समूह के कई युवक नशा करते हैं। एक को भी एचआईव्ही संक्रमित हुवा तो ये एचआईव्ही संक्रमण अन्य को फैल सकता है, साथ में टेटू (गोदना) के युवाओं में प्रचलन बढ़ा है, जिसमें प्रयुक्त असुरक्षित सुई का उपयोग भी एचआईव्ही संक्रमण का कारण बन सकता है, एचआईव्ही दवाई से पूरी तरह से ठीक नही होती वरन नियंत्रित रहती है इसलिये इस बिमारी के बारे में युवा जन को जागरूक रहना चाहियें।

जिला एड्स नोडल ने एचआइव्ही व एड्स को लेकर भ्रान्ति के संबंध में बताया कि एचआईव्ही संक्रमण से संक्रमित व्यक्ति पुरुष या महिला पूर्णतः सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, और मरीज की संज्ञा नहीं दी जाती एचआईव्ही संक्रमण के बाद यदि संक्रमित के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तब उसे एड्स कहते है एड्स होने पर विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है व मरीज की अकाल मृत्यु सभावित होती है. एचआईव्ही से संक्रमित व्यक्ति नियमित वायरस प्रतिरोधी दवाई का सेवन करता है तो एड्स होने का डर नही रहता। ये सभी दवाई मेडिकल कॉलेज से संबंधित चिकित्सालय पर पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध रहती है।

पिरामल फाउन्डेशन के जिला समन्वयक महेन्द्र तिवारी ने बताया कि एचआईव्ही संक्रमण को पति-पत्नी में माँ से बच्चे में होने से रोका जा सकता है। इसके लिये जरूरी है कि एचआईव्ही संक्रमित नियमितद वाले 4 सावधानी का पालन करें। कार्यशाला में जिला क्षय अधिकारी डॉक्टर शैलेंद्र गुप्ता, महिधर दुबे सहायक प्राध्यापक, डॉ पी.के. द्विवेदी सहायक प्राध्यापक श्रीमति पुनमः दिवान, सहायक प्राध्यापक एवं रेड रिबन क्लब के 60 से ज्यादा छात्र सम्मिलित हुये।

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