13 June 2024
कलेक्टर…एसपी सहित सभी ने दिया रेड डॉट चैलेंज को प्रोत्साहित कर माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम एवं शर्म को दूर करने का संदेश ….सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी ने विभिन्न कार्यक्रमों का जिले भर में किया आयोजन
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कलेक्टर…एसपी सहित सभी ने दिया रेड डॉट चैलेंज को प्रोत्साहित कर माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम एवं शर्म को दूर करने का संदेश ….सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी ने विभिन्न कार्यक्रमों का जिले भर में किया आयोजन

अम्बिकापुर/ माहवारी स्वच्छता दिवस पर सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी अम्बिकापुर द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन जिले भर में किया गया। इस दौरान माहवारी संगोष्ठी, रेड डॉट चैलेंज सहित कई तरह की गतिविधियां जिले भर में हुई, जिसमें स्कूली व कॉलेज की छात्राओं सहित महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। यूनिसेफ छत्तीसगढ़, एलायंस फॉर बिहेवियर चेंज छत्तीसगढ़, स्वच्छ भारत मिशन एवं छत्तीसगढ़ सरकार के विभिन्न विभागों के साथ मिल कर प्रदेश भर में 28 मई को विविध कार्यक्रमों का आयेाजन हुआ। जिसमें सरगुजा जिले के कलेक्टर विलास भोस्कर, पुलिस अधिक्षक विजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ नुतन कंवर ने भी रेड डॉट चैलेंज को प्रोत्साहित करते हुए माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम एवं शर्म को दूर करने का संदेश दिया।

सरगुजा साइंस ग्रुप द्वारा संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय में माहवारी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देव संस्कृति संस्थान, मुस्लिम महिला लोक सेवा समिति, जन शिक्षण संस्थान, अम्बिकापुर विकास समिति व अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, स्वयं सेवक सहित बीएड् कॉलेज के छात्र-छात्रायें शामिल हुई। 2014 में सरगुजा साइंस ग्रुप ने इसी महाविद्यालय से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर कार्य शुरू किया था, जिसे 28 मई माहवारी स्वच्छता दिवस पर उत्सव के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत भगवान गणेश एवं मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं पुष्पांजलि के साथ मंगलगान कर हुआ।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वैज्ञानिक डॉ प्रशांत शर्मा ने कहा कि हम चाहे जीतनी बात महिला एवं पुरूष के समानता की करते हैं, लेकिन यर्थाथ में वह धरातल पर हमारे घरों में, परिवारों में समाज में कितनी है हम वास्तविकता से परिचित हैं। पुरूष दिनभर काम से लौट कर घर पर आराम करता है, लेकिन वहीं एक कामकाजी महिला काम से लौट कर फिर से काम पर लग जाती है, इतना ही नहीं आज भी हमारे परिवारों में घर के बड़े पुरूष पहले भोजन करते हैं, फिर बच्चें और महिला जिस पर भोजन प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है सबसे अंत में भोजन करती है। जिसके कारण वह कहीं न कहीं कुपोषण सहित अन्य बिमारियों की शिकार हो रही है, यह एक वास्तविक आंकड़ा है समाज का जब महिलायें भोजन प्रबंधन का कार्य सम्हालती हैं और सबको भोजन कराती हैं तो कभी तो भूखे सोना पड़ता है तो कभी भोजन में दाल नहीं तो कभी सब्जी के बिना भोजन करना पड़ता है। वह घर-परिवार के लोगों को भरपेट इच्छानुसार भोजन करा देती है और यह नहीं देखती कि उसके लिये बच रहा है या नहीं। हमें यह देखना होगा कि हम घरों में कम से कम दोनों समय नहीं तो एक समय रात को एक साथ बैठकर भोजन करें ताकि भोजन की समतुल्यता रहे और सबको जरूरत के हिसाब से समान पोषण युक्त भोजन मिल सके। कई अन्य विषयों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए समाज के कई ऐसे उदाहरण वैज्ञानिक प्रशंात शर्मा ने देते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता की जिम्मेदारी हम सबकी है। पुरूषों को इस पर सोचना होगा, समझना होगा और इसे जिम्मेदारी के रूप में नहीं लेना है इसे अपना कर्तव्य समझना होगा। महिला यदि स्वस्थ्य और स्वच्छ है तो फिर परिवार खुलहाल है।

संत हरकेवल बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ अंजन सिंह ने कहा माहवारी स्वच्छता से पहले हम सबको मानसिक स्वच्छता की जरूरत है। माहवारी को लेकर जो भी शर्म, लज्जा या फिर कुछ कुरूतियां जुड़ी हुई हैं वह हमारे मानसिक स्तर को दर्शाता है कि हम एक महिला के मातृत्व से जुड़े विषय को लेकर क्या सोचते हैं। यदि हमने मानसिक स्वच्छता कर ली तो फिर माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर कार्य करने में ज्यादा दिक्कतें नहीं आयेगी।

सरगुजा साइंस ग्रुप के अंचल ओझा ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर सरगुजा संभाग में हो रहे कार्यों की जानकारी देते हुए एक आंकड़ा रख कर बीएड के छात्र-छात्राओं से अपिल की कि अभी माहवारी स्वच्छता पर बहुत कार्य करने की जरूरत है और भविष्य में आप सब कहीं न कहीं शिक्षक के रूप में देश के भविष्य को शिक्षित करेंगे और ऐसे समय में यह जिम्मेदारी आप पर बढ़ती है कि आप समाज में व्याप्त ऐसे विषयों को भी उठायें और स्कूली छात्र-छात्राओं को इससे अवगत करायें ताकि वे इन बातों से पहले से सचेत रहें। माहवारी के दौरान स्वच्छता क्यों जरूरी है यह बच्चीयों को बताना बेहद जरूरी है, इससे क्या नुकसान है, यदि स्वच्छता अपनाया तो क्या फायदा होगा, हमें इसे सबको बताने की आवश्यकता है। विषय यह नहीं है कि सैनेटरी पैड उपयोग कर रहे हैं या कपड़ा, विषय यह है कि दोनों के उपयोग के समय हम साफ-सफाई एवं स्व स्वच्छता का कितना ध्यान रख रहे हैं।

यूनिसेफ की सरगुजा डीएमसी ममता चौहान ने समाज के बीच से कई ऐसी सत्य घटनाओं का जिक्र कर समझाया कि लड़कियों को जब पहली माहवारी की जानकारी नहीं होती तो वे कैसी-कैसी घटनाओं और कुचक्र से गुजरती हैं। उन्होंने कहा कि एक माता-पिता के रूप में हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम अपने बच्चों के बीच में इस पर बात करें और देश के जिम्मेदार नागरिक के रूप में यदि हमें इसकी जानकारी है तो हम दूसरों से भी बात करें।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्वच्छ भारत मिशन सरगुजा के नोडल रौशन गुप्ता ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन एवं टॉयलेट निर्माण पर सरगुजा में हो रहे कार्यों की जानकारी देते हुए महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। जन शिक्षण संस्थान के निदेशक एम. सिद्दीकी ने माहवारी को लेकर जागरूकता की कमी पर बात करते हुए कहा कि अब यह आवश्यकता है कि सैनेटरी पैड भी महिलाओं को घर-घर पीडीएस के माध्यम से मिले ताकि इसका उपयोग करें और जागरूकता बढ़े। मुस्लिम महिला लोक सेवा समिति की सुल्ताना सिद्दीकी ने मुस्लिम समाज के बीच इस विषय पर उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
जिला स्तर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक पूजा पाण्डेय, सूमन पाण्डेय, रानी पाण्डेय, संत हरकेवल महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित राजलक्ष्मी पाण्डेय, हेमवंती राजवाड़े, ललीता तुरकाने, विवेक सिंह, अंजुबाला तिर्की, विपिन गहवई, रमेश यादव, सुल्ताना सिद्दीकी, राजेश्वरी निराला, अजय सिंह, आंचल कुशवाहा सहित काफी संख्या में स्वयं सेवकों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

वेडिंग व इंसिनेटर मशीन दिया कॉलेज को

सरगुजा साइंस ग्रुप द्वारा संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय को इस दौरान माहवारी स्वच्छता दिवस पर वेडिंग मशीन, इंसिनेटर व सैनेटरी पैड प्रदाय किया गया। ताकि वहां पर अध्ययनरत छात्राओं को माहवारी के दौरान किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो और सहुलियत मिल सके।

रेड डॉट चैलेंज का आयेाजन

इस वर्ष माहवारी स्वच्छता दिवस का थीम था पीरीयड फ्रेंडली वर्ल्ड, जिसे लेकर सरगुजा में विभिन्न सामाजिक संगठनों, विभिन्न विभागों के आयोजनों में त्यौहार सा माहौल था। कलेक्टर विलास भोस्कर, एसपी विजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ नुतन कंवर ने भी रेड डॉट हाथ में बना कर इस अभियान को प्रोत्साहित किया। अम्बिकापुर, लुण्ड्रा, बतौली, सीतापुर, मैनपाट, उदयपुर, लखनपुर सभी ब्लॉकों में सरगुजा साइंस ग्रुप, यूनिसेफ छत्तीसगढ़, एलायंस फॉर बिहेवियर चेंज व स्वच्छ भारत मिशन के स्वयं सेवक 28 से लगातार एक सप्ताह तक इस पर अलग-अलग आयोजन पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कर रहे हैं।

नुक्कड़ का आयोजन एवं विडियो के जरिये मिली जानकारी

जन शिक्षण संस्थान सरगुजा व सरगुजा साइंस ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में जन शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं ने माहवारी पर नुक्कड़ का आयोजन किया साथ ही विडियो के जरिेये महावारी स्वच्छता प्रबंधन पर जानकारी दी गई। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने काफी उत्साह के साथ रेड डॉट चैलेंज में हिस्सा लिया।

डाइट अम्बिकापुर में माहवारी स्वच्छता पर हुआ कार्यक्रम

डाइट अम्बिकापुर में सरगुजा संभाग के शिक्षक-शिक्षिकाओं का प्रशिक्षण चल रहा है, इस दौरान माहवारी स्वच्छता दिवस पर इन शिक्षक-शिक्षिकाओं को माहवारी पर भी जानकारी दी गई। सरगुजा साइंस ग्रुप के पदाधिकारियों ने यहां पहुंच कर इस पर खुल कर बात की और कहा कि स्कूलों में आप सब इस पर चर्चा करें, जरूरत हो तो हमें बतायें हम भी आकर बात करेंगे। शर्माना नहीं है माहवारी पर खुल कर बात करना है।

सरगुजा में हो रही माहवारी के काम को प्रदेश स्तर पर मिली नई पहचान

युनिसेफ छत्तीसगढ़ द्वारा माहवारी स्वच्छता दिवस के लिये डिजाईन किये गये पोस्टर में सरगुजा जिले में 2014 से लगातार माहवारी पर कार्य कर रहे सरगुजा साइंस ग्रुप को एक नई पहचान मिली। संस्था द्वारा 3-4 महिने पहले कतकालो व करजी में आयोजित माहवारी स्वच्छता प्रबंधन कार्यक्रम में खिंची गई फोटो को यूनिसेफ छत्तीसगढ़ द्वारा डिजाईन किये गये पोस्टर में स्थान मिला।

 

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