14 September 2026
निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग की दो टूक—नियमों की अनदेखी और बच्चों के भविष्य से लापरवाही बर्दाश्त नहीं
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निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग की दो टूक—नियमों की अनदेखी और बच्चों के भविष्य से लापरवाही बर्दाश्त नहीं

Sarguja express….

सरकारी स्कूलों से 3 से 4 प्रतिशत कम रहा निजी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम, जिला शिक्षा अधिकारी ने जताई नाराजगी; 17 सितंबर से शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान

अंबिकापुर। निजी विद्यालयों के संचालन में शासकीय प्रावधानों और मान्यता की शर्तों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश झा ने निजी विद्यालयों के प्राचार्यों और प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों की शिक्षा, व्यक्तित्व विकास तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निजी विद्यालयों से शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और विभागीय निर्देशों का समय पर पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर 12 सितंबर को जिला शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंबिकापुर में निजी विद्यालयों के प्राचार्यों की जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश झा ने की।

निजी स्कूलों में पढ़ते हैं जिले के करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थी

बैठक में डॉ. झा ने कहा कि जिले के निजी विद्यालयों में करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, इसलिए शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ इन बच्चों तक समय पर पहुंचाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कई निजी विद्यालय शासकीय प्रावधानों, आदेशों और निर्देशों के पालन में अपेक्षित रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने में परेशानी आ रही है।

उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों को सशर्त मान्यता दी जाती है और उसी के अनुरूप उनका संचालन किया जाना आवश्यक है। बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।

फीस देने के बाद बेहतर परिणाम की उम्मीद रखते हैं अभिभावक

जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी विद्यालयों के परीक्षा परिणाम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गत सत्र में निजी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम शासकीय विद्यालयों की तुलना में करीब तीन से चार प्रतिशत कम रहा। जबकि अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा फीस के रूप में देकर बच्चों के बेहतर परिणाम की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में विद्यालयों को केवल शैक्षणिक परिणाम ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर भी गंभीरता से काम करना होगा।

17 सितंबर से एक महीने चलेगा सेवा संकल्प अभियान

बैठक में बताया गया कि सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। इसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालय, संकुल, विकासखंड और जिला स्तर पर निबंध, भाषण, रंगोली, गायन और लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के साथ मशाल रैली भी आयोजित की जाएगी।

डॉ. झा ने कहा कि अभियान की विस्तृत कार्ययोजना विद्यालयों को उपलब्ध कराई जा रही है। इसके क्रियान्वयन में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बोर्ड परीक्षा से लेकर छात्रवृत्ति तक की हुई समीक्षा

सहायक संचालक रविशंकर तिवारी ने विद्यालयों के सुचारू संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता और शासन के निर्धारित मानकों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में विद्यालय फीस समिति के गठन, हिंदी उत्सव-2026, इंस्पायर अवार्ड मानक में पंजीयन, अपार जनरेशन, जाति प्रमाण-पत्र, एचपीवी टीकाकरण और छात्रवृत्ति पंजीयन की स्थिति की समीक्षा की गई।

इसके साथ ही सत्र 2026-27 की बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम के लिए कार्ययोजना तैयार करने और आवश्यक शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए गए। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इन सभी विषयों की नियमित समीक्षा की जाएगी।

 

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