16 June 2026
ग्राम गंझाडांड़ में कुटरचित वन अधिकार पत्र निरस्त, प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश
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ग्राम गंझाडांड़ में कुटरचित वन अधिकार पत्र निरस्त, प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश

Sarguja express

अम्बिकापुर /  कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा ग्राम गंझाडांड़ तहसील लुण्ड्रा में कुटरचित वन अधिकार पत्र के आधार पर भूमि पर कब्जा किए जाने के प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए संबंधित वन अधिकार पत्रों को निरस्त कर दिया गया है तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम गंझाडांड़ के समस्त ग्रामवासियों द्वारा आवेदन प्रस्तुत कर शिकायत की गई थी कि अनावेदक अशोक कुजूर के परिवार द्वारा ग्राम गंझाडांड़ स्थित भूमि खसरा क्रमांक 80/1 रकबा 19.641 हेक्टेयर भूमि में से 0.405 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। साथ ही अनावेदक जगत रानी एवं बिन्यामिन कुजूर द्वारा कथित रूप से फर्जी पट्टा बनवाकर भूमि पर दावा किया गया, जबकि उक्त भूमि पशुओं के चराई स्थल एवं आरक्षित भू-खण्ड के रूप में उपयोग में रही है।

प्रकरण में आवेदकों के आवेदन के आधार पर सुनवाई की गई तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धौरपुर से जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में यह तथ्य सामने आया कि जगतरानी एवं बिन्यामिन कुजूर के नाम जारी वन अधिकार पट्टों में अंकित राजस्व प्रकरण क्रमांक एक समान है तथा अधीक्षक भू-अभिलेख कार्यालय के दायरा पंजी में उक्त प्रकरण दर्ज नहीं है। साथ ही सील-मुद्रा एवं हस्ताक्षरों में भी भिन्नता पाई गई।

अधीक्षक भू-अभिलेख, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अम्बिकापुर की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित वन अधिकार मान्यता पत्र कार्यालय अधीक्षक भू-अभिलेख से जारी नहीं किए गए हैं तथा प्रथम दृष्टया कुटरचित एवं अवैध प्रतीत होते हैं।

प्रकरण के परीक्षण उपरांत कलेक्टर ने दोनों कुटरचित वन अधिकार पत्र क्रमांक 21/121(5)/2007-08 को निरस्त करते हुए ग्राम गंझाडांड़ तहसील लुण्ड्रा स्थित खसरा क्रमांक 80/13 की कुल 1.800-1.800 हेक्टेयर भूमि को पूर्ववत शासकीय मद में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही बिन्यामिन कुजूर एवं जगतरानी के विरुद्ध संबंधित पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धौरपुर को निर्देशित किया गया है।

कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि आदेश का पालन सुनिश्चित करते हुए सात दिवस के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।

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