Sarguja express….

अंबिकापुर/छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने कहा कि असम में जो कुछ घटित हो रहा है, वह किसी एक बयान या किसी एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान की आत्मा पर हमला है। यह उस सोच का परिणाम है, जिसमें पहले कहा गया कि “मियाँ मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए”, फिर यह बयान आया कि “उन्हें इतना परेशान करो कि वे राज्य छोड़ दें”, और अब उसी मानसिकता को एक विज्ञापन के माध्यम से गोली चलाने जैसी तस्वीरों में बदल दिया गया है।
आज असम में संविधान केवल किताबों तक सीमित होता जा रहा है। जिस संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री बने और सरकार बनी है, कम से कम उसका सम्मान तो किया जाना चाहिए था। लेकिन यहां सत्ता में बैठे लोग कानून के राज को कमजोर कर रहे हैं।यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि कानून के शासन के अंत की घोषणा जैसी है। सबसे खतरनाक बात यह है कि समाज के कमजोर और ‘दूसरे’ माने गए वर्गों के खिलाफ हिंसा की सोच को वैध बनाने का प्रयास किया जा रहा है।भाजपा असम के आधिकारिक पेज से साझा किया गया यह विज्ञापन न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि पूरी तरह आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है।
भारत के सामाजिक ताने-बाने को बचाने और इसके संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एकता और न्याय की ज़रूरत है।
हम मांग करते हैं कि
या तो दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए,या फिर सरकार खुले तौर पर स्वीकार करे कि आज के भारत में नफरत को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।अब बीच का कोई रास्ता नहीं बचा है।

