13 March 2026
बलरामपुर में ढाई एकड़ में अवैध अफीम का मामला… करीब दो करोड़ की फसल जब्त, दो किसान गिरफ्तार
कार्रवाई क्राइम बड़ी खबर राज्य

बलरामपुर में ढाई एकड़ में अवैध अफीम का मामला… करीब दो करोड़ की फसल जब्त, दो किसान गिरफ्तार

Sarguja express

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध अफीम की खेती के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब ढाई एकड़ में लगी अफीम की फसल को उखाड़कर जब्त किया है। जब्त की गई अफीम का कुल वजन 18 क्विंटल 87 किलो बताया जा रहा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई कोरंधा थाना क्षेत्र के खजूरी गांव में की गई।
जानकारी के अनुसार बुधवार शाम को प्रशासन को खजूरी गांव में अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और खेतों में लगी पूरी फसल को उखाड़कर जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान कुल 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद किए गए, जिन्हें तीन ट्रैक्टरों में भरकर कोरंधा थाना लाया गया।
इस मामले में पुलिस ने अफीम की खेती करने के आरोप में दो किसानों सहादुर नगेशिया और दुईला राम को गिरफ्तार किया है। फिलहाल दोनों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। दोनों किसानों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस फसल की खेती वे कर रहे हैं, वह अफीम है और उसकी खेती गैरकानूनी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किसान दुईला राम का खुद का खेत नहीं है। उसने गांव के ही किसान रोपना से सालाना छह हजार रुपये देने की शर्त पर जमीन बंधक पर लेकर खेती शुरू की थी। दूसरी ओर सहादुर नगेशिया का अपना खेत है, जहां पर अफीम की फसल लगाई गई थी।
किसानों ने पूछताछ में बताया कि झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले भूपेंद्र उरांव ने उनसे संपर्क किया था। उसने किसानों को यह कहकर तैयार किया था कि वे मसाले की खेती कराएंगे, जिससे अच्छी आमदनी होगी। फसल तैयार होने के बाद मुनाफे का हिस्सा उन्हें भी दिया जाएगा। इसी लालच में आकर दोनों किसानों ने अपने खेतों में इस फसल की बुवाई कर दी।
दुईला राम ने बताया कि इससे पहले उसने अपने खेत में मक्का की खेती की थी, लेकिन उसमें उसे कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसने खेत के कुछ हिस्से में सरसों की खेती की थी, जिससे थोड़ा बहुत लाभ मिला था। इसी दौरान भूपेंद्र उरांव ने उससे संपर्क किया और मसाले की खेती का प्रस्ताव दिया। उसने भरोसा दिलाया कि इस खेती से अच्छी कमाई होगी, जिसके बाद वह तैयार हो गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। सहादुर नगेशिया के खेत में लगी अफीम की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी थी। खेत में लगे अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे हुए पाए गए, जिससे स्पष्ट है कि उनसे काफी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी थी। वहीं दूसरी ओर दुईला राम के खेत में लगी फसल में अभी डोडे लगे हुए थे और कुछ पौधों में डोडे लगना शुरू ही हुए थे। कई डोडों में चीरा लगाकर उनसे अफीम निकालने की प्रक्रिया भी चल रही थी।
हालांकि खेतों से निकाली गई अफीम बरामद नहीं हो सकी है। किसानों ने पुलिस को बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग खेतों में रहकर फसल की देखरेख करते थे। वही लोग पहरेदारी करने के साथ-साथ खेती का काम भी संभालते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही ये सभी लोग मौके से फरार हो गए।
अफीम की खेती के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पास के प्राकृतिक जल स्रोत से पाइप लाइन के जरिए सिंचाई की व्यवस्था की गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि खेती सुनियोजित तरीके से की जा रही थी।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। इससे पहले भी जिले के कुसमी क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन ने कहा है कि भविष्य में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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