13 January 2026
परीक्षा से डेढ़ महीने पहले ही छात्रों पर थोपा गया 500 रुपये का भारी विलंब शुल्क
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परीक्षा से डेढ़ महीने पहले ही छात्रों पर थोपा गया 500 रुपये का भारी विलंब शुल्क

Sarguja express….

विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी…रचित मिश्रा ने जताई कड़ी आपत्ति

अम्बिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा मुख्य परीक्षा सत्र 2025-26 के लिए जारी की गई नई अधिसूचना ने छात्र जगत में भारी रोष पैदा कर दिया है। आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय को छात्र विरोधी बताते हुए कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन बिना किसी ठोस आधार के ग्रामीण और आदिवासी अंचल के गरीब विद्यार्थियों की जेब पर डाका डालने की कोशिश कर रहा है।

​रचित मिश्रा ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 8 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना में अचानक विलंब शुल्क को ₹500 कर दिया गया है, जो कि पूरी तरह से तर्कहीन है। उन्होंने कहा कि अब तक की व्यवस्था के अनुसार विलंब शुल्क मात्र ₹100 लिया जाता था, जिसे अब एकमुश्त पांच गुना बढ़ा दिया गया है। एक तरफ जहाँ सरकार शिक्षा को सुलभ बनाने की बात करती है, वहीं विश्वविद्यालय का यह फैसला विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहा है।

​इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल समय को लेकर खड़ा हो रहा है। रचित मिश्रा ने तर्क दिया है कि सामान्यतः भारी विलंब शुल्क की वसूली तब की जाती है जब परीक्षा शुरू होने में मात्र 15 से 20 दिन का समय बचा हो और एडमिट कार्ड तैयार करने जैसी तकनीकी चुनौतियां हों। लेकिन वर्तमान स्थिति में मुख्य परीक्षाओं के आयोजन में अभी भी लगभग डेढ़ महीने का लंबा समय शेष है। इतनी लंबी अवधि पहले ही ₹500 जैसा भारी जुर्माना वसूलना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

​सरगुजा संभाग की भौगोलिक और आर्थिक स्थितियों का हवाला देते हुए छात्र नेता ने कहा कि यहाँ का अधिकांश विद्यार्थी वर्ग ग्रामीण परिवेश से आता है। इन छात्रों के लिए सामान्य परीक्षा शुल्क जुटाना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में अचानक लिए गए इस फैसले के कारण कई मेधावी छात्र केवल आर्थिक तंगी की वजह से परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो सकते हैं। विश्वविद्यालय को एक शिक्षण संस्थान की तरह व्यवहार करना चाहिए, न कि किसी व्यावसायिक संस्था की तरह जो केवल राजस्व बढ़ाने पर केंद्रित हो।
​ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई है कि 15 जनवरी 2026 तक भरे जाने वाले आवेदन पत्रों से विलंब शुल्क की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से विलोपित किया जाए। रचित मिश्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया और छात्रों को राहत प्रदान नहीं की, तो छात्र संघ इसे एक जन आंदोलन का रूप देगा। संभाग के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके हक की लड़ाई के लिए आजाद सेवा संघ के द्वारा सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।

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