27 March 2026
‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ के विरोध में संयुक्त मसीह समाज का हल्लाबोल; लाखों की संख्या में किया राजभवन का घेराव….’काला कानून वापस लो’ के नारों से गूँजी राजधानी; तूता धरना स्थल से पैदल निकले हजारों प्रदर्शनकारी, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
आयोजन आरोप देश बड़ी खबर मांग राज्य विरोध

‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ के विरोध में संयुक्त मसीह समाज का हल्लाबोल; लाखों की संख्या में किया राजभवन का घेराव….’काला कानून वापस लो’ के नारों से गूँजी राजधानी; तूता धरना स्थल से पैदल निकले हजारों प्रदर्शनकारी, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

Sarguja express

रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ के खिलाफ मसीही समाज का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। शुक्रवार, 27 मार्च को ‘संयुक्त मसीही समाज छत्तीसगढ़’ के बैनर तले प्रदेशभर से आए लाखों लोगों ने राजधानी रायपुर में विशाल प्रदर्शन किया और राजभवन का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने इस विधेयक को “काला कानून” करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

तूता धरना स्थल पर उमड़ा जनसैलाब

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10 बजे से ही नया रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर मसीही समाज के लोग जुटना शुरू हो गए थे। दोपहर होते-होते यहाँ लाखों लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शन में पुरुष, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए।

धरना स्थल पर सभा के बाद दोपहर में भीड़ ने राजभवन घेराव के लिए प्रस्थान किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था और कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी। ‘न्याय नहीं तो आंदोलन होगा’ और ‘हम संविधान के साथ हैं-अन्याय के खिलाफ हैं’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

समाज की प्रमुख मांगें

संयुक्त मसीही समाज के नेतृत्वकर्ताओं—प्रभाकर सोनी, कृतेश मानिकपुरी और रुबेन उके ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। समाज ने राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन में मुख्य रूप से 7 बिंदु रखे हैं:

● विवादित धर्म विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए।

● संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का पूर्णतः पालन सुनिश्चित हो।

● किसी भी समुदाय के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव बंद किया जाए।

● मसीही समाज के खिलाफ दर्ज किए जा रहे झूठे मामलों और उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगे।

● मानवाधिकारों की रक्षा की जाए और सभी धर्मों को समान सुरक्षा व सम्मान मिले।

● धार्मिक स्वतंत्रता में प्रशासनिक हस्तक्षेप को बंद किया जाए।

“अधिकारों पर प्रहार बर्दाश्त नहीं”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रभाकर सोनी ने कहा, न्याय, स्वतंत्रता और समानता हमारी पहचान है। यह विधेयक हमारी निजी आस्था और संवैधानिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। यदि सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती है, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और भी उग्र होगा।

इस दौरान प्रभाकर सोनी, कृतेश मानिकपुरी, रुबेन ऊके, पास्टर अनील कुमार, मेमन थॉमस, हरिश कुमार सहित सयुंक्त मसीह समाज के पदाधिकारी व भारी संख्या में मसीह समाज के लोग उपस्थित रहे।

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